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Varanasi News: 40 हजार श्रद्धालुओं ने पिशाचमोचन पर किया पिंडदान, छह दिनों में दो लाख लोगों ने कराया तर्पण
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पिशाचमोचन पर पितरों के तर्पण के लिए पूजा करते लोग। अमर उजाला
वाराणसी। पितृपक्ष पर काशी में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। षष्ठी तिथि पर बृहस्पतिवार को पिशाचमोचन तीर्थ व विभिन्न गंगा घाटों पर तर्पण करने वालों की भीड़ नजर आई। पिशाचमोचन कुंड पर 40 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने पितरों की मुक्ति और पितृदोष निवारण के लिए विधि-विधान से तर्पण व श्राद्धकर्म संपन्न किया।
बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 10 से अधिक राज्यों से पहुंचे लोगों के कारण पिशाचमोचन क्षेत्र और संपर्क मार्गों पर गाड़ियों की लाइन लगी रही। सुबह के अर्घ्य से लेकर देर रात तक पिशाचमोचन कुंड के चारों ओर पुरोहितों के मंत्रोच्चार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कुल-कुटुंब की खुशहाली के लिए विशेष रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध अनुष्ठान करवाए।
पितृपक्ष की शुरुआत से ही काशी में रोजाना औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु पिंडदान के लिए पहुंच रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, बीते छह दिनों में अब तक दो लाख से अधिक श्रद्धालु पिशाचमोचन कुंड और गंगा तटों पर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर चुके हैं। तीर्थ पुरोहित मुन्ना पांडेय, पं. आनंद पांडेय और पं. अनिल उपाध्याय ने बताया कि सामान्य दिनों में यह संख्या 10 से 15 हजार रहती है, जबकि प्रमुख तिथियों और शुभ नक्षत्रों पर प्रतिदिन 30 से 40 हजार लोग तर्पण कर्म के लिए जुट रहे हैं।
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बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 10 से अधिक राज्यों से पहुंचे लोगों के कारण पिशाचमोचन क्षेत्र और संपर्क मार्गों पर गाड़ियों की लाइन लगी रही। सुबह के अर्घ्य से लेकर देर रात तक पिशाचमोचन कुंड के चारों ओर पुरोहितों के मंत्रोच्चार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कुल-कुटुंब की खुशहाली के लिए विशेष रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध अनुष्ठान करवाए।
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पितृपक्ष की शुरुआत से ही काशी में रोजाना औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु पिंडदान के लिए पहुंच रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, बीते छह दिनों में अब तक दो लाख से अधिक श्रद्धालु पिशाचमोचन कुंड और गंगा तटों पर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर चुके हैं। तीर्थ पुरोहित मुन्ना पांडेय, पं. आनंद पांडेय और पं. अनिल उपाध्याय ने बताया कि सामान्य दिनों में यह संख्या 10 से 15 हजार रहती है, जबकि प्रमुख तिथियों और शुभ नक्षत्रों पर प्रतिदिन 30 से 40 हजार लोग तर्पण कर्म के लिए जुट रहे हैं।
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