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संस्कृति के मंच से समाज को आइना
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वाराणसी। बीएचयू कला संकाय के चार दिवसीय युवा महोत्सव संस्कृति का शुभारंभ सोमवार को हुआ। पहले दिन प्रतिभागियों ने एकल अभिनय से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। नाट्य प्रतियोगिता में बेरोजगारी, जल संकट, पर्यावरण प्रदूषण से बचाने की अपील की गई। नाटक, मूक अभिनय, मिमिक्री के साथ ही रंगोली, मेहंदी, कोलाज, आन द स्पॉट फोटोग्राफी, निबंध लेखन प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कला संकाय प्रमुख प्रो. अशोक कुमार सिंह, छात्र सलाहकार डॉ. रंजीत प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। एकल अभिनय में सोनल कुशवाहा ने छात्रा पर एसिड अटैक और उससे जीवन में आने वाली कठिनाइयों का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया तो नीतिश सुमन ने गुजरात दंगे की चर्चा की। इसके अलावा बाल श्रम, दहेज प्रथा, बाल शोषण जैसी कुरीतियों को न केवल अभिनय से दर्शाया, बल्कि इससे बचाव को आगे आने का आह्वान किया। मिमिक्री में बॉलीवुड के कलाकारों से लेकर राजनेताओं की आवाज सुनाकर प्रतिभागियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दौरान प्रो. चंपा सिंह, डॉ. धीरेंद्र राय, प्रो. उपेंद्र कुमार, प्रो. अमित उपाध्याय, छात्र समन्वयक अभिषेक मिश्र, शिवम द्विवेदी, सुकेशी ऋषभ आदि मौजूद रहे।
इनसेट
हाथों पर मेहंदी का रंग
संस्कृति के पहले दिन मेहंदी प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों की 20 छात्राओं ने हाथों पर अलग-अलग डिजाइन की मेहंदी रचाई। अपने सहयोगियों की मदद से उन्होंने एक से बढ़कर एक डिजाइन की मेहंदी सजाकर जीत की दावेदरी पेश की।
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कला संकाय प्रमुख प्रो. अशोक कुमार सिंह, छात्र सलाहकार डॉ. रंजीत प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। एकल अभिनय में सोनल कुशवाहा ने छात्रा पर एसिड अटैक और उससे जीवन में आने वाली कठिनाइयों का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया तो नीतिश सुमन ने गुजरात दंगे की चर्चा की। इसके अलावा बाल श्रम, दहेज प्रथा, बाल शोषण जैसी कुरीतियों को न केवल अभिनय से दर्शाया, बल्कि इससे बचाव को आगे आने का आह्वान किया। मिमिक्री में बॉलीवुड के कलाकारों से लेकर राजनेताओं की आवाज सुनाकर प्रतिभागियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दौरान प्रो. चंपा सिंह, डॉ. धीरेंद्र राय, प्रो. उपेंद्र कुमार, प्रो. अमित उपाध्याय, छात्र समन्वयक अभिषेक मिश्र, शिवम द्विवेदी, सुकेशी ऋषभ आदि मौजूद रहे।
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हाथों पर मेहंदी का रंग
संस्कृति के पहले दिन मेहंदी प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों की 20 छात्राओं ने हाथों पर अलग-अलग डिजाइन की मेहंदी रचाई। अपने सहयोगियों की मदद से उन्होंने एक से बढ़कर एक डिजाइन की मेहंदी सजाकर जीत की दावेदरी पेश की।
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