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विश्वनाथ से सारनाथ तक भ्रमण कर निहाल हुए अतिथि
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जय नारायण यादव
वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन से पर्यटन के नजरिये से काशी विश्व फलक पर नए कलेवर में उभरी है। उम्मीद जगी है कि एक रात और एक दिन का टूर कर लौट जाने वाले पर्यटक अब यहां ज्यादा समय गुजारेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि मंगलवार को मेहमानों ने दिव्य गंगा आरती देखी। संकरी गलियों में समय बिताया। गंगा घाट पर मार्निंग वॉक की तो सारनाथ जाकर भगवान बुद्ध के दर्शन को जाना। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर दर्शन भी किए। इतना सबकुछ जानने से निहाल अतिथियों ने कहा कि अद्भुत है काशी और यहां के लोग।
अमेरिकी निवासी भारतीय मूल के वीरेंद्र ने कहा कि काशी में बहुत कुछ देखने को मिला। गंगा आरती दिव्य और अलौकिक है। सारनाथ में भगवान बुद्ध की स्थली आकर्षक लगी। मलेश्यिा से आए सुब्रमणयम ने कहा- काशी यात्रा ने यहां का मुरीद बना दिया। वाराणसी जीवंत और धार्मिक शहर है। यह संदेश देश के लोगों तक पहुंचाऊंगा। अमेरिका की संयुक्ता जायसवाल और कतर के जावेद ने कहा- काशी के बारे में सुना था, लेकिन देखा नहीं था। सम्मेलन के बहाने इसे देखने का अवसर मिला जो भव्य था। यहां पर्यटन की अपार संभावनएं है।
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वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन से पर्यटन के नजरिये से काशी विश्व फलक पर नए कलेवर में उभरी है। उम्मीद जगी है कि एक रात और एक दिन का टूर कर लौट जाने वाले पर्यटक अब यहां ज्यादा समय गुजारेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि मंगलवार को मेहमानों ने दिव्य गंगा आरती देखी। संकरी गलियों में समय बिताया। गंगा घाट पर मार्निंग वॉक की तो सारनाथ जाकर भगवान बुद्ध के दर्शन को जाना। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर दर्शन भी किए। इतना सबकुछ जानने से निहाल अतिथियों ने कहा कि अद्भुत है काशी और यहां के लोग।
अमेरिकी निवासी भारतीय मूल के वीरेंद्र ने कहा कि काशी में बहुत कुछ देखने को मिला। गंगा आरती दिव्य और अलौकिक है। सारनाथ में भगवान बुद्ध की स्थली आकर्षक लगी। मलेश्यिा से आए सुब्रमणयम ने कहा- काशी यात्रा ने यहां का मुरीद बना दिया। वाराणसी जीवंत और धार्मिक शहर है। यह संदेश देश के लोगों तक पहुंचाऊंगा। अमेरिका की संयुक्ता जायसवाल और कतर के जावेद ने कहा- काशी के बारे में सुना था, लेकिन देखा नहीं था। सम्मेलन के बहाने इसे देखने का अवसर मिला जो भव्य था। यहां पर्यटन की अपार संभावनएं है।
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