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रिमझिम बारिश ने दिलाई गर्मी से राहत
Updated Thu, 28 Jun 2018 12:45 AM IST
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ज्ञानपुर। लंबे इंतजार के बाद बुधवार को कालीन नगरी में मानसून ने दस्तक दे दी। रात में उमड़-घुमड़ के बाद भोर में चार बजे से लेकर सुबह साढ़े छह बजे तक करीब ढाई घंटे रिमझिम बरसात हुई। इससे तमाम निचले इलाकों में जलजमाव हो गया और तपिश से हांफ रहे जनजीवन ने राहत की सांस ली। मौसम के बदले मिजाज से किसानों के चेहरे खिल गए। बारिश के अभाव में पीली पड़ रहीं फसलों में जान आ गई। दिन भर बादल छाए रहे लेकिन दोपहर बाद उमस में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई और लोग पसीने-पसीने हो गए।
मंगलवार को पूरे दिन आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ के बाद बुधवार को देर रात में इंद्रदेव मेहरबान हो गए। काली कजरारी घटाओं ने भोर में चार बजे के आसपास बरसना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में बारिश तेज थी, लेकिन चंद मिनटों बाद ही यह रिमझिम बरसात में तब्दील हो गई। हालांकि यह सिलसिला सुबह साढ़े छह बजे तक लगातार चलता रहा। इससे निचले इलाके में हल्का जलजमाव हो गया और कच्ची सड़कें कीचड़ से सन गईं। दूसरी ओर पहली बारिश में ही नगर निकायों के इंतजाम धुल गए। ज्ञानपुर नगर के अलावा गोपीगंज, भदोही, घोसिया, सुरियावां आदि नगरों की नालियों में जमा कचरा बारिश होते ही बजबजाने लगा और दुर्गंध के चलते आने-जाने वाले लोग झेल गए। बारिश के बाद आसमान में बादलों की मौजूदगी के बीच हल्की हवाओं से मौसम सुहाना हो गया। लेकिन, यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रह सकी। दोपहर बाद हवाएं बंद हो गईं और उमस ने उबाल कर रख दिया। लोगों का कहना था कि बारिश ठीक से हो गई रहती तो शायद तपन से राहत मिल जाती। बारिश से धान की नर्सरी और हरी सब्जियों के पौधों में नई जान आ गई। पीली पड़ रहीं फसलों की पोरें बारिश के बाद फिर से हरी-भरी हो गईं। मौसम के रुख से चहके किसान धान की खेती की तैयारी में जुट गए। कई स्थानों पर धान की अगैती खेती कर रहे किसानों ने धान की नर्सरी उखड़वाकर रोपाई भी शुरू करा दी।
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मंगलवार को पूरे दिन आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ के बाद बुधवार को देर रात में इंद्रदेव मेहरबान हो गए। काली कजरारी घटाओं ने भोर में चार बजे के आसपास बरसना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में बारिश तेज थी, लेकिन चंद मिनटों बाद ही यह रिमझिम बरसात में तब्दील हो गई। हालांकि यह सिलसिला सुबह साढ़े छह बजे तक लगातार चलता रहा। इससे निचले इलाके में हल्का जलजमाव हो गया और कच्ची सड़कें कीचड़ से सन गईं। दूसरी ओर पहली बारिश में ही नगर निकायों के इंतजाम धुल गए। ज्ञानपुर नगर के अलावा गोपीगंज, भदोही, घोसिया, सुरियावां आदि नगरों की नालियों में जमा कचरा बारिश होते ही बजबजाने लगा और दुर्गंध के चलते आने-जाने वाले लोग झेल गए। बारिश के बाद आसमान में बादलों की मौजूदगी के बीच हल्की हवाओं से मौसम सुहाना हो गया। लेकिन, यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रह सकी। दोपहर बाद हवाएं बंद हो गईं और उमस ने उबाल कर रख दिया। लोगों का कहना था कि बारिश ठीक से हो गई रहती तो शायद तपन से राहत मिल जाती। बारिश से धान की नर्सरी और हरी सब्जियों के पौधों में नई जान आ गई। पीली पड़ रहीं फसलों की पोरें बारिश के बाद फिर से हरी-भरी हो गईं। मौसम के रुख से चहके किसान धान की खेती की तैयारी में जुट गए। कई स्थानों पर धान की अगैती खेती कर रहे किसानों ने धान की नर्सरी उखड़वाकर रोपाई भी शुरू करा दी।
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