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सुरों की मिठास में घुली फागुनी रंगत
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:07 AM IST
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वाराणसी। सुरों की मिठास में फागुनी रंगत घुली तो मन-मिजाज मस्ती से भर उठा। सुरों से सजी चैत की शाम में गीत-संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियां हर किसी को विभोर कर गईं। अवसर था, पीएनयू क्लब में ‘सुगना बोलतीं हमरी अटरिया’ के आयोजन का। लोक संगीत की खुशबू फैली और श्रोता मंत्रमुग्ध होकर तालियां बजाते रहे। कभी फागुनी बहार छाई तो कभी चैती, दादरा के बोल पर मस्ती के रंग चटख हुए।
पीएनयू क्लब के सुसज्जित मंच पर काशी की संगीत परंपरा की रौनक देखते बनी। पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र और पद्मश्री मालिनी अवस्थी के स्वरलहरियों पर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने गणेश वंदना से गायन की शुरुआत की। उनकी दूसरी प्रस्तुति काशी नगरी की महिमा को बखानती ‘काशी नगरी की महिमा अपार है शिव क दरबार है’ पर लोग भावविभोर हो उठे और फिर जब ‘खेले मसाने में होली दिगंबर खेले मसाने में होली’ सुनाया तो हर कोई झूम उठा।
इसके बाद पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने समा बांधा। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत ठुमरी से की। शुरुआत राग माज खमाज में ‘जाग पड़ी मैं तो पिया के जगाए’ से की। इसके बाद दादरा ‘पूरब देश से आई गोरिया’ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चैती की शुरुआत ‘सुगना बोलतीं हमरी अटरिया’ से की तो श्रोता तालियों की गूंज के बीच संगीत के आनंद में डूब गए। उनकी अगली प्रस्तुति चैती रही, जिसके बोल थे ‘सोवत निंदिया...भोरे-भोरे’। इस दौरान उन्होंने लोगों की फरमाइशों पर भी कई मधुर गीत सुनाए। सहयोगी कलाकारों में हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर उस्ताद मुराद अली खां और तबले पर पं. रामकुमार मिश्र ने संगत की। इससे पूर्व कलाकारों का स्वागत पीएनयू क्लब के अध्यक्ष रमेश गिनोडिया, मानद महासिचव बलवीर सिंह बग्गा, पूर्व सचिव अशोक वर्मा, अनुज डिडवानिया और धर्मेंद्र सिंह ने किया। आयोजन समिति में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. श्रद्धानंद, विकास पाठक, अभय त्रिपाठी, अशोक कपूर, मनीष कपूर, नवीन कपूर, डॉ. संजय राय, जयदीप सिंह ‘बब्लू’, कुमार अजय शामिल रहे।
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पीएनयू क्लब के सुसज्जित मंच पर काशी की संगीत परंपरा की रौनक देखते बनी। पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र और पद्मश्री मालिनी अवस्थी के स्वरलहरियों पर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने गणेश वंदना से गायन की शुरुआत की। उनकी दूसरी प्रस्तुति काशी नगरी की महिमा को बखानती ‘काशी नगरी की महिमा अपार है शिव क दरबार है’ पर लोग भावविभोर हो उठे और फिर जब ‘खेले मसाने में होली दिगंबर खेले मसाने में होली’ सुनाया तो हर कोई झूम उठा।
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इसके बाद पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने समा बांधा। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत ठुमरी से की। शुरुआत राग माज खमाज में ‘जाग पड़ी मैं तो पिया के जगाए’ से की। इसके बाद दादरा ‘पूरब देश से आई गोरिया’ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चैती की शुरुआत ‘सुगना बोलतीं हमरी अटरिया’ से की तो श्रोता तालियों की गूंज के बीच संगीत के आनंद में डूब गए। उनकी अगली प्रस्तुति चैती रही, जिसके बोल थे ‘सोवत निंदिया...भोरे-भोरे’। इस दौरान उन्होंने लोगों की फरमाइशों पर भी कई मधुर गीत सुनाए। सहयोगी कलाकारों में हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर उस्ताद मुराद अली खां और तबले पर पं. रामकुमार मिश्र ने संगत की। इससे पूर्व कलाकारों का स्वागत पीएनयू क्लब के अध्यक्ष रमेश गिनोडिया, मानद महासिचव बलवीर सिंह बग्गा, पूर्व सचिव अशोक वर्मा, अनुज डिडवानिया और धर्मेंद्र सिंह ने किया। आयोजन समिति में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. श्रद्धानंद, विकास पाठक, अभय त्रिपाठी, अशोक कपूर, मनीष कपूर, नवीन कपूर, डॉ. संजय राय, जयदीप सिंह ‘बब्लू’, कुमार अजय शामिल रहे।
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