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ऐसा रूप और आकार, जो हर कोई देखे बार-बार
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:01 AM IST
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वाराणसी। बड़ा लालपुर स्थित हस्तकला संकुल में रखा छह फिट का अशोक स्तंभ आकर्षण का केंद्र बना है। यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग इसके साथ सेल्फी लेना नहीं भूलते। दरअसल यह वाराणसी वुड कार्विंग का नायाब उदाहरण है। बनारस में 500 से ज्यादा शिल्पी इस कार्य में जुड़े हैं जो लकड़ी को ऐसा आकार देते हैं कि हर देखने वाले की नजर ठहर जाती है।
दो से ढाई साल से बनारस में वुड कार्विंग का काम हो रहा है। पहले हाथी दांत पर नक्खासी का काम होता था। ब्रिटिश काल में हाथी दांत दक्षिण अफ्रीका से आते थे और उस पर नक्खासी के बाद बाहर भेज दिए जाते थे। हाथी दांत पर प्रतिबंध लगने के बाद चंदन की लकड़ी पर यह काम शुरू हुआ। जब इस पर भी प्रतिबंध लग गया तो कैमी की लकड़ी पर काम हो रहा है। वुड कार्विंग से भगवान बुद्ध की मूर्ति, अशोक स्तंभ आदि बनाए जाते हैं। इसके अलावा चिलम, पेपरवेट सहित जानवरों की आकृतियां भी बनती हैं। लकड़ी से सजावटी सामान भी बनाए जाते हैं। प्रेम शंकर विश्वकर्मा ने लकड़ी से निर्मित सबसे बड़ा अशोक स्तंभ बनाया जो संकुल में रखा है। कमल के फूल की आकृति चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा ने बनाया है। इस कला को हस्तकला संकुल में जगह मिलने को प्रेम शंकर विश्वकर्मा, चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा, संतोष, राजेश, महेष प्रसाद, संदीप विश्वकर्मा, राजेश विश्वकर्मा उत्साहित हैं। इस शिल्प के जीआई का प्रयास ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा है।
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दो से ढाई साल से बनारस में वुड कार्विंग का काम हो रहा है। पहले हाथी दांत पर नक्खासी का काम होता था। ब्रिटिश काल में हाथी दांत दक्षिण अफ्रीका से आते थे और उस पर नक्खासी के बाद बाहर भेज दिए जाते थे। हाथी दांत पर प्रतिबंध लगने के बाद चंदन की लकड़ी पर यह काम शुरू हुआ। जब इस पर भी प्रतिबंध लग गया तो कैमी की लकड़ी पर काम हो रहा है। वुड कार्विंग से भगवान बुद्ध की मूर्ति, अशोक स्तंभ आदि बनाए जाते हैं। इसके अलावा चिलम, पेपरवेट सहित जानवरों की आकृतियां भी बनती हैं। लकड़ी से सजावटी सामान भी बनाए जाते हैं। प्रेम शंकर विश्वकर्मा ने लकड़ी से निर्मित सबसे बड़ा अशोक स्तंभ बनाया जो संकुल में रखा है। कमल के फूल की आकृति चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा ने बनाया है। इस कला को हस्तकला संकुल में जगह मिलने को प्रेम शंकर विश्वकर्मा, चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा, संतोष, राजेश, महेष प्रसाद, संदीप विश्वकर्मा, राजेश विश्वकर्मा उत्साहित हैं। इस शिल्प के जीआई का प्रयास ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा है।
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