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वैदिक परंपराओं पर आधारित है दीनदयाल का दर्शन

Fri, 08 Sep 2017 02:03 AM IST
Updated Fri, 08 Sep 2017 02:03 AM IST
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वैदिक परंपराओं पर आधारित है दीनदयाल का दर्शन
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनैतिक चितंन पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवनी पर विस्तृत चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि पं दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन वैदिक परंपराओं पर आधारित रहा है। उनका अनुसरण करना होगा।
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पाणिनी भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में दीक्षित ने कहा कि दीनदयाल का जीवन दर्शन वैदिक परम्पराओं एवं सभ्यता के तत्वो को पोषित करने वाला है। इसका अनुसरण करके ही एकात्ममानववाद के दर्शन को भारतीय समाज के परंपराओं के अनुसार स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने इनके चिंतन परंपरा को समाज के विकास एवं दीर्घकालिक, स्थायी एवं बुनियादी मूल्यों की स्थापना के लिए जरूरी बताया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे ने बताया कि उनके जीवनी पर चर्चा की। बतौर विशिष्ट अतिथि मुख्य आयुक्त दिव्यांग कमलेश पांडेय, शहर उत्तरी विधायक रविंद्र जायसवाल, केदारनाथ ने भी दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन को अनुकरणीय बताया। इस दौरान प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी, डॉ. शैलेश मिश्रा, जगदीश त्रिपाठी, व्यास मिश्र, अरविंद सिंह, मदन मोहन दूबे, संजय भारद्वाज सहित कई लोग मौजूद रहे।
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