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रक्षाबंधन पर बहन को शौचालय की सौगात
Updated Sun, 06 Aug 2017 02:16 AM IST
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वाराणसी। गहने, साड़ियां और कीमती उपहार तो रक्षाबंधन पर भाई बहनों को देते ही हैं, पर घमहापुर के अशोक पटेल ने अपनी बहन को इस बार एक खास तोहफा दिया है। दस साल से सुनीता की ससुराल में शौचालय नहीं था। वह शर्म, संकोच के चलते किसी से कुछ कह भी नहीं पाती थी लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर उसने भाई से तोहफे में शौचालय की सौगात मांग ही ली। घमहापुर के प्रधान प्रतिनिधि अशोक ने भी बहन को निराश नहीं किया। उसने बहन की ससुराल में शौचालय बनवाकर न केवल उसे उपहार दिया बल्कि दूसरों के लिए भी बड़ी नजीर पेश की। होप फाउंडेशन की पहल पर बनाए गए वाट्सएप ग्रुप पर पूर्वांचल भर के ग्राम प्रधानों के बीच अशोक की ये पहल सराही जा रही है।
घमहापुर की सुनीता देवी की शादी 2006 में राजातालाब के दीपापुर के प्रभात पटेल से हुई थी। ससुराल में शौचालय नहीं था। इसकी वजह से उन्हें या तो दिन ढलने का इंतजार करना पड़ता या सुबह तड़के ही उठना पड़ता। सुनीता कहती हैं कि हैं कई बार शौच के वक्त लड़कियों-महिलाओं के साथ अनहोनी की खबरें भी सुनती थीं। ऐसे में बाहर जाने में शर्म, संकोच के साथ एक अनजाना खौफ भी मन में बना रहता था। इधर बीच देखा कि महिलाएं-बहुएं घर में शौचालय के लिए आवाज उठा रही हैं। फिर मैंने भी अपने भाई से ये सौगात मांग ही ली। यहां तक कह दिया कि शौचालय बनवाओगे तभी राखी बांधने आऊंगी। अच्छा ये लगा कि भाई ने भी मेरी बात का मान रखा। उनकी सास राजकुमारी का भी कहना है कि भाई हो तो अशोक जैसा।
सुनीता के भाई अशोक पटेल का कहना है कि रक्षाबंधन पर बहन की इच्छा कोई भाई कैसे ठुकरा सकता है। और ये मांग तो सिर आंखों पर। बहन की ससुराल पहुंचकर वे खुद चार दिन से रुके हैं और शौचालय बनवा रहे हैं। खुद भी मजदूर की तरह ईंटें ढो रहे हैं। पूरी कोशिश है कि रक्षाबंधन के दिन पहले यानी रविवार तक शौचालय तैयार हो जाए। इधर, सुनीता बेहद खुश हैं। इस बार का रक्षाबंधन उनके लिए भाई के इस अनूठे तोहफे से यादगार बन जाएगा।
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घमहापुर की सुनीता देवी की शादी 2006 में राजातालाब के दीपापुर के प्रभात पटेल से हुई थी। ससुराल में शौचालय नहीं था। इसकी वजह से उन्हें या तो दिन ढलने का इंतजार करना पड़ता या सुबह तड़के ही उठना पड़ता। सुनीता कहती हैं कि हैं कई बार शौच के वक्त लड़कियों-महिलाओं के साथ अनहोनी की खबरें भी सुनती थीं। ऐसे में बाहर जाने में शर्म, संकोच के साथ एक अनजाना खौफ भी मन में बना रहता था। इधर बीच देखा कि महिलाएं-बहुएं घर में शौचालय के लिए आवाज उठा रही हैं। फिर मैंने भी अपने भाई से ये सौगात मांग ही ली। यहां तक कह दिया कि शौचालय बनवाओगे तभी राखी बांधने आऊंगी। अच्छा ये लगा कि भाई ने भी मेरी बात का मान रखा। उनकी सास राजकुमारी का भी कहना है कि भाई हो तो अशोक जैसा।
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सुनीता के भाई अशोक पटेल का कहना है कि रक्षाबंधन पर बहन की इच्छा कोई भाई कैसे ठुकरा सकता है। और ये मांग तो सिर आंखों पर। बहन की ससुराल पहुंचकर वे खुद चार दिन से रुके हैं और शौचालय बनवा रहे हैं। खुद भी मजदूर की तरह ईंटें ढो रहे हैं। पूरी कोशिश है कि रक्षाबंधन के दिन पहले यानी रविवार तक शौचालय तैयार हो जाए। इधर, सुनीता बेहद खुश हैं। इस बार का रक्षाबंधन उनके लिए भाई के इस अनूठे तोहफे से यादगार बन जाएगा।
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