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शासकों में मतभेद बढ़ेंगे, कोर्ट से सुलझेंगे बड़े मामले
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वाराणसी। चैत्र मास की प्रतिपदा से नवसंवत्सर इस बार शनिवार 6 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार नए संवत्सर के राजा शनि और मंत्री सूर्य होंगे। शनि और सूर्य एक-दूसरे के दुश्मन हैं। इसीलिए माना जा रहा है यह वर्ष बहुत ही उठापटक वाला होगा। सूर्य शनि में शत्रु भाव होने के कारण शासकों में मतभेद और विरोध की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्थिति सशक्त होगी और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के आसार हैं।
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार वर्ष लग्न में लग्न का स्वामी चंद्रमा त्रिकोणस्थ होकर मित्रगृही होने के कारण आंतरिक व्यवस्था और सीमा सुरक्षा में भारत की स्थिति सुदृढ़ करेगा। राष्ट्र की सैन्य शक्ति भी समृद्ध होगी लेकिन पड़ोसी राष्ट्रों से तनावपूर्ण स्थिति बनती दिख रही है। विकास और प्रशासनिक अव्यवस्थाएं उन्नत रहेंगी। विश्व में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और कई देश भारत से मैत्री के लिए उत्सुक रहेंगे। मेघेश शनि होने से बारिश ज्यादा होगी और पूर्वोत्तर में इसी कारण जन-धन हानि की आशंका है। सस्येश बुध होने से खरीफ की फसलों रसेश बुध होने से फलों और दुग्ध पदार्थों का उत्पादन बढ़ेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि इस नव संवत्सर का नाम परिधावी है। शनि के राजा और सूर्य के पुत्र होने पर एक-दूसरे का मतभेद चलता रहेगा। सत्तारूढ़ गठबंधन में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर मतभेद दिखेंगे। मतभेद भी अलग तरह के होंगे। महत्वपूर्ण विषयों पर प्रधानमंत्री की राय के अपेक्षा संगठन की राय को महत्व मिलेगा। यही नहीं, विषमताओं और विसंगतियों के कारण गठबंधन का स्वरूप भी बदल सकता है। खाद्यान्न का उत्पादन तो बढ़ेगा परंतु प्राकृतिक आपदा और आतंकवादी घटनाओं से देश को परेशानी होगी।
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ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार पुत्र शनि के राजा और पिता सूर्य के मंत्री होने से नेताओं और नौकरशाहों में सामंजस्य नहीं बनेगा। हालांकि देश की प्रगति, विश्व में अच्छी छवि और भारत की पहचान में बढ़ोत्तरी होगी। शनि को न्याय का प्रतीक माना गया है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया से कई बड़े मामले सुलझने की संभावना है। ग्रहों के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप की आशंका रहेगी। वर्षा अच्छी होगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
मान्यता के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। इस दिन से ही सतयुग का प्रारंभ भी माना गया है। इसी महत्व के मद्देनजर सम्राट विक्रमादित्य ने करीब ढाई हजार पहले संवत्सर की शुरुआत की थी।
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बीएचयू के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार वर्ष लग्न में लग्न का स्वामी चंद्रमा त्रिकोणस्थ होकर मित्रगृही होने के कारण आंतरिक व्यवस्था और सीमा सुरक्षा में भारत की स्थिति सुदृढ़ करेगा। राष्ट्र की सैन्य शक्ति भी समृद्ध होगी लेकिन पड़ोसी राष्ट्रों से तनावपूर्ण स्थिति बनती दिख रही है। विकास और प्रशासनिक अव्यवस्थाएं उन्नत रहेंगी। विश्व में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और कई देश भारत से मैत्री के लिए उत्सुक रहेंगे। मेघेश शनि होने से बारिश ज्यादा होगी और पूर्वोत्तर में इसी कारण जन-धन हानि की आशंका है। सस्येश बुध होने से खरीफ की फसलों रसेश बुध होने से फलों और दुग्ध पदार्थों का उत्पादन बढ़ेगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि इस नव संवत्सर का नाम परिधावी है। शनि के राजा और सूर्य के पुत्र होने पर एक-दूसरे का मतभेद चलता रहेगा। सत्तारूढ़ गठबंधन में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर मतभेद दिखेंगे। मतभेद भी अलग तरह के होंगे। महत्वपूर्ण विषयों पर प्रधानमंत्री की राय के अपेक्षा संगठन की राय को महत्व मिलेगा। यही नहीं, विषमताओं और विसंगतियों के कारण गठबंधन का स्वरूप भी बदल सकता है। खाद्यान्न का उत्पादन तो बढ़ेगा परंतु प्राकृतिक आपदा और आतंकवादी घटनाओं से देश को परेशानी होगी।
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ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार पुत्र शनि के राजा और पिता सूर्य के मंत्री होने से नेताओं और नौकरशाहों में सामंजस्य नहीं बनेगा। हालांकि देश की प्रगति, विश्व में अच्छी छवि और भारत की पहचान में बढ़ोत्तरी होगी। शनि को न्याय का प्रतीक माना गया है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया से कई बड़े मामले सुलझने की संभावना है। ग्रहों के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप की आशंका रहेगी। वर्षा अच्छी होगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
मान्यता के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। इस दिन से ही सतयुग का प्रारंभ भी माना गया है। इसी महत्व के मद्देनजर सम्राट विक्रमादित्य ने करीब ढाई हजार पहले संवत्सर की शुरुआत की थी।