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पॉलिथीन पर रोक का आदेश बेअसर
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:32 AM IST
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ज्ञानपुर। पर्यावरण और सेहत के लिए बेहद खतरनाक पॉलिथीन का रोक के बावजूद धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। अदालत के आदेश पर सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने का फरमान तो करीब डेढ़ साल पहले ही जारी कर दिया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते पॉलिथीन पर अंकुश नहीं लग सका। चाय-पान, किराना व सब्जी की दुकानों और शोरूम से लेकर घरों तक पॉलिथीन का उपयोग जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने 2016 में पॉलिथीन के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर किया था। शुरुआत में कुछ दिनों तक इसका असर दिखा लेकिन उसके बाद आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अफसरों की लापरवाही के कारण जिले में पॉलिथीन का उपयोग खुलेआम हो रहा है। चाय-पान और सब्जी की दुकानों से लेकर शोरूम तक पॉलिथीन सामान ढोने का प्रमुख जरिया बनी है। दुकानों में पॉलिथीन की बिक्री भी धड़ल्ले से हो रही है। एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक जिले में प्रतिदिन पांच टन पॉलिथीन का उपयोग होता है, जो अगले दिन कचरे के रूप में पर्यावरण के लिए जहर बन जाता है। इसकी न तो पुलिस-प्रशासन को फिक्र है, न ही नगर निकायों को। शासन से आदेश जारी होने के बाद दो-चार दिनों तक दुकानदारों ने एहतियातन पॉलिथीन से संकोच किया, लेकिन प्रशासन की ढिलाई के चलते फिर पुराने ढर्रे पर आ गए। लिहाजा पॉलिथीन में ही सामान की बिक्री जारी रही। कभी नष्ट न होने वाली पॉलिथीन जलाने के बाद भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। इससे निकलने वाली जहरीली गैसें वायु प्रदूषण का कारक बनती हैं, जबकि मिट्टी में दबकर यह मृदा प्रदूषण और नदियों, तालाबों को भी दूषित करती है। मसलन हर लिहाज से यह पर्यावरण और इंसान की सेहत के लिए खतरनाक है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने 2016 में पॉलिथीन के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर किया था। शुरुआत में कुछ दिनों तक इसका असर दिखा लेकिन उसके बाद आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अफसरों की लापरवाही के कारण जिले में पॉलिथीन का उपयोग खुलेआम हो रहा है। चाय-पान और सब्जी की दुकानों से लेकर शोरूम तक पॉलिथीन सामान ढोने का प्रमुख जरिया बनी है। दुकानों में पॉलिथीन की बिक्री भी धड़ल्ले से हो रही है। एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक जिले में प्रतिदिन पांच टन पॉलिथीन का उपयोग होता है, जो अगले दिन कचरे के रूप में पर्यावरण के लिए जहर बन जाता है। इसकी न तो पुलिस-प्रशासन को फिक्र है, न ही नगर निकायों को। शासन से आदेश जारी होने के बाद दो-चार दिनों तक दुकानदारों ने एहतियातन पॉलिथीन से संकोच किया, लेकिन प्रशासन की ढिलाई के चलते फिर पुराने ढर्रे पर आ गए। लिहाजा पॉलिथीन में ही सामान की बिक्री जारी रही। कभी नष्ट न होने वाली पॉलिथीन जलाने के बाद भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। इससे निकलने वाली जहरीली गैसें वायु प्रदूषण का कारक बनती हैं, जबकि मिट्टी में दबकर यह मृदा प्रदूषण और नदियों, तालाबों को भी दूषित करती है। मसलन हर लिहाज से यह पर्यावरण और इंसान की सेहत के लिए खतरनाक है।
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