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आवास बना दिया, शौचालय भूल गए
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:24 AM IST
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ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां जिले को ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) बनाने की मुहिम चल रही है, वहीं करीब डेढ़ दर्जन लोहिया गांवों में बनाए गए सौ से अधिक आवासों में दो वर्ष बाद भी शौचालय नहीं बनाए जा सके। आवास आवंटन के बाद से लाभार्थियों ने ब्लॉक से लेकर जिले के अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इससे लाभार्थियों में खासी नाराजगी है।
सपा सरकार की डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र गांव योजना के तहत पिछड़े गांवों का चयन कर वहां के गरीबों को लोहिया आवास का आवंटन किया गया था। 3.50 लाख की लागत से आवास का निर्माण कराने के साथ उसमें शौचालय, सोलर लाइट समेत अन्य सुविधाएं दी गई थी। इसके तहत जिले में 2013 से 2016 के बीच लोहिया समग्र गांव के तहत 85 गांवों का चयन हुआ था। इन गांवों में गरीबों के लिए 2150 आवासों का निर्माण कराया गया।
वर्ष 2016 में चयनित गांवों में करीब 600 आवास गरीबों को आवंटित किए गए। इनमें सौ से अधिक आवास ऐसे हैं, जिनमें शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया था। औराई के ठेगीपुर रतना गांव में 32 लाभार्थियों को लोहिया आवास बिना शौचालय के आवंटित कर दिए गए थे। डीघ ब्लॉक के सुजातपुर, इटहरा, बनकट, छेछुआ समेत डेढ़ दर्जन गांवों में भी आवंटित आवासों में शौचालय नहीं बनाए गए थे। ठेगीपुर रतना गांव के लाभार्थी राजाराम, बालकिशुन, रामराज, छेदीलाल, संजय, पतिया आदि का आरोप है कि शौचालय के लिए वे तीन साल से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। इस बारे में परियोजना निदेशक डीआरडीए आरएन सिंह का कहना है कहा कि लोहिया आवासों में शौचालय नहीं होने की शिकायत उन्हें नहीं मिली है। मामले की जांच कराकर शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।
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मालूम हो कि 31 मार्च तक जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शासन से करोड़ों रुपये आवंटित होने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी है। यही वजह है कि अभी हजारों शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं, लोहिया आवासों के लाभार्थियों की शिकायत के बावजूद शौचालय नहीं बनवाए जा रहे।
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सपा सरकार की डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र गांव योजना के तहत पिछड़े गांवों का चयन कर वहां के गरीबों को लोहिया आवास का आवंटन किया गया था। 3.50 लाख की लागत से आवास का निर्माण कराने के साथ उसमें शौचालय, सोलर लाइट समेत अन्य सुविधाएं दी गई थी। इसके तहत जिले में 2013 से 2016 के बीच लोहिया समग्र गांव के तहत 85 गांवों का चयन हुआ था। इन गांवों में गरीबों के लिए 2150 आवासों का निर्माण कराया गया।
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वर्ष 2016 में चयनित गांवों में करीब 600 आवास गरीबों को आवंटित किए गए। इनमें सौ से अधिक आवास ऐसे हैं, जिनमें शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया था। औराई के ठेगीपुर रतना गांव में 32 लाभार्थियों को लोहिया आवास बिना शौचालय के आवंटित कर दिए गए थे। डीघ ब्लॉक के सुजातपुर, इटहरा, बनकट, छेछुआ समेत डेढ़ दर्जन गांवों में भी आवंटित आवासों में शौचालय नहीं बनाए गए थे। ठेगीपुर रतना गांव के लाभार्थी राजाराम, बालकिशुन, रामराज, छेदीलाल, संजय, पतिया आदि का आरोप है कि शौचालय के लिए वे तीन साल से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। इस बारे में परियोजना निदेशक डीआरडीए आरएन सिंह का कहना है कहा कि लोहिया आवासों में शौचालय नहीं होने की शिकायत उन्हें नहीं मिली है। मामले की जांच कराकर शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।
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मालूम हो कि 31 मार्च तक जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शासन से करोड़ों रुपये आवंटित होने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी है। यही वजह है कि अभी हजारों शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं, लोहिया आवासों के लाभार्थियों की शिकायत के बावजूद शौचालय नहीं बनवाए जा रहे।