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खनन
Updated Tue, 09 Jan 2018 09:33 PM IST
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रमचंदीपुर में अवैध खनन का मामला
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मेन
...तो दो-तीन दिन में फिर शुरू हो जाएगा बालू खनन
प्वाइंटर
- ठेकेदार और गांव के लोगों को प्रशासनिक सख्ती खत्म होने की उम्मीद
- 15 से ज्यादा ग्रामीणों ने कुछ ही समय में ढुलाई के लिए नए ट्रैक्टर खरीदे
- घाट पर पट्टाधारक अब भी काबिज, असलहों से लैस लोग कर रहे सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। रमचंदीपुर में बालू का अवैध खनन बंद होने और जांच के लिए खनिज निदेशालय की टीम के इंतजार के बावजूद गांव के लोगों को कोई चिंता नहीं है। उन्हें लगता है कि बालू का खनन ज्यादा दिन बंद नहीं रहने वाला है। अगले दो-तीन दिन में काम फिर चालू हो जाएगा। दरअसल, बालू लेने वाले और इस काम से किसी न किसी रूप में जुड़े लोगों को ठेकेदार भी दावे के साथ बताता है कि दो-तीन दिन इंतजार कर लो...अभी थोड़ी सख्ती है...यह सब ज्यादा दिन नहीं चलेगा।
मंगलवार को अमर उजाला ने इस गांव का दौरा किया तो देखा कि लगातार हो रहे बालू खनन से यहां के हालात बदल गए हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि खनन की वजह से कई लोगों को रोजगार मिला हुआ है। 15 से ज्यादा लोगों ने नए ट्रैक्टर खरीद लिए हैं। कुछ लोगों ने रिश्तेदारों के यहां से ट्र्रैक्टर मंगवाकर खनन में ढुलाई के लिए लगवाए थे। नियमों को धता बताकर हो रहे बालू खनन से इतनी आमदनी हो रही है कि कहीं न कहीं से कर्ज लेकर ट्रैक्टर खरीदने वाले लोग अगले छह महीने में ही किस्त भरने का दावा कर रहे हैं।
चंद्रा चौमुहानी से बलुआ घाट रोड पर जाल्हूपुर से करीब 12 किलोमीटर अंदर रमचंदीपुर गांव पहुंचने के लिए संकरा रास्ता है। आमने-सामने दो कारें बमुश्किल निकल सकती हैं। इस रास्ते से बालू लदे सैकड़ों ट्रकों और ट्रैक्टर का आवागमन होता है। सड़क के दोनों ओर की पटरी पर जमा बालू इसको साबित करती है। वैसे, गांव में जिस घाट पर खनन हो रहा है, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। घाट की तरफ जाते ही ठेके दार के लोग पूछताछ शुरू कर देते हैं। संदिग्ध लगने पर चुपचाप पीछा भी करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां दिनभर दो सुरक्षाकर्मी असलहे लेकर ड्यूटी देते हैं।
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जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद किसी जांच-पड़ताल के अंदेशे में घाट के आसपास और गांव से जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर तो हटा दिए गए हैं लेकिन घाट पर ठेकेदारों और उसके लोगों का अस्थायी ठिकाना जस का तस है। पानी सूखने की वजह से गंगा में चारों ओर रेत ही रेत दिखाई देता है। बीच में कुछ स्थानों पर ढूहे नजर आते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां तक बेखौफ ढंग से खनन किया गया है। कई जगहों पर ऊंचाई की असमानता है। रेत जमने की वजह से कहीं ऊंचाई ज्यादा तो कहीं कम है। इतने ज्यादा क्षेत्रफल में बता पाना मुश्किल है कि खनन कहां-कहां हुआ है।
खनिज निदेशालय की टीम की जांच-पड़ताल में स्पष्ट हो सकेगा कि कहां-कहां खनन किया गया है? अनुमति कितने खनन की थी और कितना किया गया है? प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार ने अगर मानक और अनुमति से ज्यादा खनन किया होगा तो रायल्टी वसूलने के साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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रमचंदीपुर में अवैध खनन का मामला
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...तो दो-तीन दिन में फिर शुरू हो जाएगा बालू खनन
प्वाइंटर
- ठेकेदार और गांव के लोगों को प्रशासनिक सख्ती खत्म होने की उम्मीद
- 15 से ज्यादा ग्रामीणों ने कुछ ही समय में ढुलाई के लिए नए ट्रैक्टर खरीदे
- घाट पर पट्टाधारक अब भी काबिज, असलहों से लैस लोग कर रहे सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। रमचंदीपुर में बालू का अवैध खनन बंद होने और जांच के लिए खनिज निदेशालय की टीम के इंतजार के बावजूद गांव के लोगों को कोई चिंता नहीं है। उन्हें लगता है कि बालू का खनन ज्यादा दिन बंद नहीं रहने वाला है। अगले दो-तीन दिन में काम फिर चालू हो जाएगा। दरअसल, बालू लेने वाले और इस काम से किसी न किसी रूप में जुड़े लोगों को ठेकेदार भी दावे के साथ बताता है कि दो-तीन दिन इंतजार कर लो...अभी थोड़ी सख्ती है...यह सब ज्यादा दिन नहीं चलेगा।
मंगलवार को अमर उजाला ने इस गांव का दौरा किया तो देखा कि लगातार हो रहे बालू खनन से यहां के हालात बदल गए हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि खनन की वजह से कई लोगों को रोजगार मिला हुआ है। 15 से ज्यादा लोगों ने नए ट्रैक्टर खरीद लिए हैं। कुछ लोगों ने रिश्तेदारों के यहां से ट्र्रैक्टर मंगवाकर खनन में ढुलाई के लिए लगवाए थे। नियमों को धता बताकर हो रहे बालू खनन से इतनी आमदनी हो रही है कि कहीं न कहीं से कर्ज लेकर ट्रैक्टर खरीदने वाले लोग अगले छह महीने में ही किस्त भरने का दावा कर रहे हैं।
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चंद्रा चौमुहानी से बलुआ घाट रोड पर जाल्हूपुर से करीब 12 किलोमीटर अंदर रमचंदीपुर गांव पहुंचने के लिए संकरा रास्ता है। आमने-सामने दो कारें बमुश्किल निकल सकती हैं। इस रास्ते से बालू लदे सैकड़ों ट्रकों और ट्रैक्टर का आवागमन होता है। सड़क के दोनों ओर की पटरी पर जमा बालू इसको साबित करती है। वैसे, गांव में जिस घाट पर खनन हो रहा है, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। घाट की तरफ जाते ही ठेके दार के लोग पूछताछ शुरू कर देते हैं। संदिग्ध लगने पर चुपचाप पीछा भी करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां दिनभर दो सुरक्षाकर्मी असलहे लेकर ड्यूटी देते हैं।
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जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद किसी जांच-पड़ताल के अंदेशे में घाट के आसपास और गांव से जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर तो हटा दिए गए हैं लेकिन घाट पर ठेकेदारों और उसके लोगों का अस्थायी ठिकाना जस का तस है। पानी सूखने की वजह से गंगा में चारों ओर रेत ही रेत दिखाई देता है। बीच में कुछ स्थानों पर ढूहे नजर आते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां तक बेखौफ ढंग से खनन किया गया है। कई जगहों पर ऊंचाई की असमानता है। रेत जमने की वजह से कहीं ऊंचाई ज्यादा तो कहीं कम है। इतने ज्यादा क्षेत्रफल में बता पाना मुश्किल है कि खनन कहां-कहां हुआ है।
खनिज निदेशालय की टीम की जांच-पड़ताल में स्पष्ट हो सकेगा कि कहां-कहां खनन किया गया है? अनुमति कितने खनन की थी और कितना किया गया है? प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार ने अगर मानक और अनुमति से ज्यादा खनन किया होगा तो रायल्टी वसूलने के साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।