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बनारसी कांच की मोतियों पर चीन की नजर
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:43 AM IST
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वाराणसी। चीन भारतीय उत्पादों से प्रतिस्पर्द्धा करते करते अब उनकी नकल भी करने लगा है। ताजा मामला बनारसी कांच की मोतियों से जुड़ा है। सस्ते उत्पादों के जरिए दुनिया भर के बाजार में पैठ बनाने में जुटा चीन इन मोतियों की नई डिजाइन के ऑनलाइन होते ही उसे कॉपी कर अपने उत्पाद के तौर पर बाजार में उतार दे रहा है। चीनी कंपनियों की इस नकल से भारतीय बीड्स कारोबारियों के लिए निर्यात के साथ ही घरेलू बाजार में भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। गुणवत्ता के मामले में भारतीय उत्पादों को टक्कर नहीं दे पाने के बावजूद सस्ते होने के चलते चीनी उत्पाद की दखल भारत के घरेलू बाजार में भी बढ़ी है।
कांच की मोतियों का बनारस से बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। विश्वस्तरीय गुणवत्ता और डिजाइन के लिए यहां की कांच की मोतियों की दुनिया में अपनी अलग पहचान है। वाराणसी के बीड्स उद्योग से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि मोतियों के लिए तैयार की जा रही डिजाइन के ऑनलाइन होते ही चीन उसे कॉपी कर ले रहा है। वहां की कंपनियां उसे अपने अधिकृत उत्पाद के तौर पर विश्व बाजार में पेश कर रही हैं। बनारसी मोती निर्माता संघ के अध्यक्ष व बनारस बीड्स लिमिटेड के अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक अशोक गुप्ता ने बताया कि भारतीय उत्पादों की नकल के लिए चीनी कंपनियां कई तरह के हथकंडे अपनाती हैं। वहां श्रम और कच्चा माल सस्ता है, इस नाते चीनी उत्पादों की कीमतें भारतीय उत्पादों की तुलना में कम हैं लेकिन गुणवत्ता के मामले में भारतीय उत्पादों के आगे वे कहीं नहीं ठहरते। हालांकि जिस तेजी से मोती कारोबार में चीन ने अपनी दखल बढ़ाई है, उसे देखते हुए भारत सरकार को चाहिए कि वह भी जरूरी कदम उठाए। भारतीय बीड्स उद्यमियों को चीन से मुकाबले के लिए ठोस नीति और सरकार के सहयोग की जरूरत है। सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो मोती उद्योग से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।
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कांच की मोतियों का बनारस से बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। विश्वस्तरीय गुणवत्ता और डिजाइन के लिए यहां की कांच की मोतियों की दुनिया में अपनी अलग पहचान है। वाराणसी के बीड्स उद्योग से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि मोतियों के लिए तैयार की जा रही डिजाइन के ऑनलाइन होते ही चीन उसे कॉपी कर ले रहा है। वहां की कंपनियां उसे अपने अधिकृत उत्पाद के तौर पर विश्व बाजार में पेश कर रही हैं। बनारसी मोती निर्माता संघ के अध्यक्ष व बनारस बीड्स लिमिटेड के अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक अशोक गुप्ता ने बताया कि भारतीय उत्पादों की नकल के लिए चीनी कंपनियां कई तरह के हथकंडे अपनाती हैं। वहां श्रम और कच्चा माल सस्ता है, इस नाते चीनी उत्पादों की कीमतें भारतीय उत्पादों की तुलना में कम हैं लेकिन गुणवत्ता के मामले में भारतीय उत्पादों के आगे वे कहीं नहीं ठहरते। हालांकि जिस तेजी से मोती कारोबार में चीन ने अपनी दखल बढ़ाई है, उसे देखते हुए भारत सरकार को चाहिए कि वह भी जरूरी कदम उठाए। भारतीय बीड्स उद्यमियों को चीन से मुकाबले के लिए ठोस नीति और सरकार के सहयोग की जरूरत है। सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो मोती उद्योग से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।
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