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मन का बिखराव सरसों के दाने की तरह समेटना मुश्किल
Updated Wed, 19 Jul 2017 01:47 AM IST
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वाराणसी। श्रीमद्भागवत कथा के प्रख्यात व्याख्याता बाल व्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने मंगलवार को धर्म की विशद व्याख्या की। कहा कि मौजूदा समय कुकुरमुत्ते की भांति धर्म का चोंगा पहने लोग निकल रहे हैं। उनका लक्ष्य धनार्जन होता है। उन्होंने इस तरह के धर्म के अलंबरदारों से सचेत रहने की प्रेरणा दी। असल में धर्म वह है जो सबको सुख-शांति प्रदान करे। उन्होंने बताया कि मन को समेट कर रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि मन बिखर जाए तो उसे समेटना उसी तरह मुश्किल हो जाता है जिस प्रकार बिखरे सरसों के दानों को समेटना कठिन हो जाता है।
नाटी इमली के भरत मिलाप मैदान में उमड़ी कथा प्रेमियों की भीड़ के बीच काशी की महान संत परंपरा पर रोशनी डाली। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। बताया कि एक बार करपात्री जी महाराज जाड़े में बीमार पड़ गए लेकिन उन्होंने पूजन का क्रम नहीं छोड़ा। एक शिष्य ने उन्हें सलाह दी कि स्वामी जी आप लेटे-लेटे ही पूजन कर लिया करें, आपका स्वास्थ ठीक नहीं है। इस पर स्वामी जी कुछ नहीं बोले। थोड़ी देर बाद उस शिष्य ने स्वामी जी को फिर से टोका। इस पर वह शिष्य पर बिफर पड़े। पूजा पूरी होने के बाद शिष्य को बुलाकर उन्होंने बताया कि जिस समय तुम मुझे लेट कर पूजा करने के लिए कह रहे थे उस वक्त मैं ठाकुर जी को स्नान करा रहा था। यदि मैं लेट कर पूजा करता और उसी वक्त मेरी आंख लग जाती तो उन्हें वस्त्र नहीं पहना पाता और प्रभु को ठंड लग जाती।
बालव्यास ने कहा कि काशी ऐसे संतों की धरा धाम रही है। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी व्यक्ति को ऐश्वर्य की कामना हो तो वह शिव पूजन अवश्य करें। परम पिता परमेश्वर की शरण में पहुंचने पर जीवन के सारे लक्ष्य पूर्ण हो जाते हैं। जैसे ग्वाला अपनी गायों को ढूंढता है उसी प्रकार परमात्मा भी अपने समस्त जीवों को ढूंढ लेता है।
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डांडिया नृत्य से महिलाओं ने गणेश जन्मोत्सव में लगाया चार चांद
कथा मंडप में गणेश जन्मोत्सव के दौरान महिलाओं ने डांडिया नृत्य की थिरकन से चार चांद लगा दिया। गुलाब जल के साथ फूलों की वर्षा हो रही थी। मारवाड़ी युवा मंच (वाराणसी गंगा) की महिला सदस्यों ने डांडिया नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी।
डांडिया पर थिरकती झूमती महिलाओं ने कथा मंडप को बेहद मोहक बना दिया था। शिवशंकर के घर आनंद भयो... गीत पर जमकर डांडिया किया। युवा मंच की अध्यक्ष नीतू मुरारका, रजनी कनोड़िया, अनिता भालोटिया, उमा बजाज, संगीता बजाज, अनुराधा बजाज, अनीता खेमका, मीनू पोद्यार, नीतू नवलगढ़िया, श्वेता केडिया, अंजू सर्राफ, संगीता मानसिंहका, मधु तुलस्यान, उषा जगनानी, नेहा गिनोडिया, प्रीति गोयनका, गरिमा नवलगढ़िया, प्रेरणा बाजोरिया, सुमन खेमका ने नृत्य पेश किया।
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नाटी इमली के भरत मिलाप मैदान में उमड़ी कथा प्रेमियों की भीड़ के बीच काशी की महान संत परंपरा पर रोशनी डाली। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। बताया कि एक बार करपात्री जी महाराज जाड़े में बीमार पड़ गए लेकिन उन्होंने पूजन का क्रम नहीं छोड़ा। एक शिष्य ने उन्हें सलाह दी कि स्वामी जी आप लेटे-लेटे ही पूजन कर लिया करें, आपका स्वास्थ ठीक नहीं है। इस पर स्वामी जी कुछ नहीं बोले। थोड़ी देर बाद उस शिष्य ने स्वामी जी को फिर से टोका। इस पर वह शिष्य पर बिफर पड़े। पूजा पूरी होने के बाद शिष्य को बुलाकर उन्होंने बताया कि जिस समय तुम मुझे लेट कर पूजा करने के लिए कह रहे थे उस वक्त मैं ठाकुर जी को स्नान करा रहा था। यदि मैं लेट कर पूजा करता और उसी वक्त मेरी आंख लग जाती तो उन्हें वस्त्र नहीं पहना पाता और प्रभु को ठंड लग जाती।
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बालव्यास ने कहा कि काशी ऐसे संतों की धरा धाम रही है। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी व्यक्ति को ऐश्वर्य की कामना हो तो वह शिव पूजन अवश्य करें। परम पिता परमेश्वर की शरण में पहुंचने पर जीवन के सारे लक्ष्य पूर्ण हो जाते हैं। जैसे ग्वाला अपनी गायों को ढूंढता है उसी प्रकार परमात्मा भी अपने समस्त जीवों को ढूंढ लेता है।
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डांडिया नृत्य से महिलाओं ने गणेश जन्मोत्सव में लगाया चार चांद
कथा मंडप में गणेश जन्मोत्सव के दौरान महिलाओं ने डांडिया नृत्य की थिरकन से चार चांद लगा दिया। गुलाब जल के साथ फूलों की वर्षा हो रही थी। मारवाड़ी युवा मंच (वाराणसी गंगा) की महिला सदस्यों ने डांडिया नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी।
डांडिया पर थिरकती झूमती महिलाओं ने कथा मंडप को बेहद मोहक बना दिया था। शिवशंकर के घर आनंद भयो... गीत पर जमकर डांडिया किया। युवा मंच की अध्यक्ष नीतू मुरारका, रजनी कनोड़िया, अनिता भालोटिया, उमा बजाज, संगीता बजाज, अनुराधा बजाज, अनीता खेमका, मीनू पोद्यार, नीतू नवलगढ़िया, श्वेता केडिया, अंजू सर्राफ, संगीता मानसिंहका, मधु तुलस्यान, उषा जगनानी, नेहा गिनोडिया, प्रीति गोयनका, गरिमा नवलगढ़िया, प्रेरणा बाजोरिया, सुमन खेमका ने नृत्य पेश किया।