{"_id":"595ea3394f1c1b66388b4679","slug":"21499374393-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू में संकाय प्रमुख व महिला शिक्षक में रार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू में संकाय प्रमुख व महिला शिक्षक में रार
Updated Fri, 07 Jul 2017 02:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। बीएचयू के पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग की महिला शिक्षिका और कला संकाय प्रमुख के बीच गुरुवार को नोंकझोंक हो गई। कला संकाय प्रमुख द्वारा उपस्थिति रजिस्टर पर क्रॉस लगाने से नाराज शिक्षिका ने प्रमुख पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए चीफ प्रॉक्टर से इसकी शिकायत की है। शिकायत को लंका थाने को भेजने का आग्रह किया गया है। उधर, प्रमुख ने उत्पीड़न के आरोप को गलत बताते हुए शिक्षिका पर बिना बताए विश्वविद्यालय न आने की बात कही है।
महिला शिक्षिका डॉ. शोभना नर्लिकर का आरोप है कि वह अपने विभागाध्यक्ष की ओर से केवल कुछ ही शिक्षकों को बार-बार कमेटी में रखने की शिकायत करने संकाय प्रमुख के पास गई थीं। संकाय प्रमुख ने जहां उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
उधर, कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज ने बताया कि सत्रारंभ और सत्र समाप्ति के दिन उपस्थिति आवश्यक होती है। डॉ. नर्लिकर इन दोनों दिवसों पर बिना बताए गायब रहीं। तीन जुलाई को विश्वविद्यालय खुलने के बाद जब वह नहीं आई तो चार जुलाई को उपस्थिति रजिस्टर मंगाकर उन्हें अनुपस्थित कर दिया। बार-बार एक ही शिक्षकों को कमेटी में रखने का आरोप भी गलत है। उनका उत्पीड़न नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला शिक्षिका डॉ. शोभना नर्लिकर का आरोप है कि वह अपने विभागाध्यक्ष की ओर से केवल कुछ ही शिक्षकों को बार-बार कमेटी में रखने की शिकायत करने संकाय प्रमुख के पास गई थीं। संकाय प्रमुख ने जहां उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
विज्ञापन
उधर, कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज ने बताया कि सत्रारंभ और सत्र समाप्ति के दिन उपस्थिति आवश्यक होती है। डॉ. नर्लिकर इन दोनों दिवसों पर बिना बताए गायब रहीं। तीन जुलाई को विश्वविद्यालय खुलने के बाद जब वह नहीं आई तो चार जुलाई को उपस्थिति रजिस्टर मंगाकर उन्हें अनुपस्थित कर दिया। बार-बार एक ही शिक्षकों को कमेटी में रखने का आरोप भी गलत है। उनका उत्पीड़न नहीं किया गया है।
विज्ञापन