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1320 किलो गांजा और नगदी के साथ पांच तस्कर गिरफ्तार
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वाराणसी। ओडिशा से गांजा लेकर भदोही जा रहे ट्रक को एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने अखरी स्थित ओवरब्रिज के समीप घेरेबंदी कर पकड़ा। ट्रक से 1320 किलोग्राम गांजा, 10 हजार रुपये और पांच मोबाइल के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की शिनाख्त बिहार के बक्सर के ददन यादव, आरा के उदय शंकर यादव व ध्रुवनाथ सिंह और झारखंड के पलामू के सुरेंद्र महतो व जयराम विश्वकर्मा के तौर पर हुई है। पांचों को गुरुवार को जेल भेज दिया गया।
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के डिप्टी एसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि अभिसूचना संकलन के दौरान जानकारी मिली थी कि तस्कर गांजा की खेप लेकर ओडिशा से बिहार होते हुए बनारस आ रहे हैं। बनारस से सभी को भदोही जिले के औराई थाना के महाराजगंज बाजार के जटाशंकर दुबे और मोनू बाबा के पास गांजा की खेप पहुंचानी थी। जटाशंकर और मोनू गांजा की खेप को पूर्वांचल के अन्य जिलों में भेजवाते। इस सूचना पर एसटीएफ की वाराणसी इकाई और लखनऊ की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने अखरी स्थित ओवरब्रिज के समीप घेरेबंदी कर ट्रक को पकड़ा।
पूछताछ में सामने आया कि ट्रक मालिक छत्तीसगढ़ के रायपुर का रवींद्र सिंह गांजा की तस्करी में शामिल है। गांजा की तस्करी के लिए ट्रक के केबिन के ऊपर कैविटी बनवाया गया था। गांजा की खेप ले जाने वाले ट्रक चालक को प्रति फेरी 50 हजार रुपये दिया जाता था। इसके साथ ही ट्रक में मौजूद अन्य लोगों को प्रति किलोग्राम पांच सौ रुपये दिया जाता था।
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एसटीएफ की वाराणसी इकाई के डिप्टी एसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि अभिसूचना संकलन के दौरान जानकारी मिली थी कि तस्कर गांजा की खेप लेकर ओडिशा से बिहार होते हुए बनारस आ रहे हैं। बनारस से सभी को भदोही जिले के औराई थाना के महाराजगंज बाजार के जटाशंकर दुबे और मोनू बाबा के पास गांजा की खेप पहुंचानी थी। जटाशंकर और मोनू गांजा की खेप को पूर्वांचल के अन्य जिलों में भेजवाते। इस सूचना पर एसटीएफ की वाराणसी इकाई और लखनऊ की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने अखरी स्थित ओवरब्रिज के समीप घेरेबंदी कर ट्रक को पकड़ा।
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पूछताछ में सामने आया कि ट्रक मालिक छत्तीसगढ़ के रायपुर का रवींद्र सिंह गांजा की तस्करी में शामिल है। गांजा की तस्करी के लिए ट्रक के केबिन के ऊपर कैविटी बनवाया गया था। गांजा की खेप ले जाने वाले ट्रक चालक को प्रति फेरी 50 हजार रुपये दिया जाता था। इसके साथ ही ट्रक में मौजूद अन्य लोगों को प्रति किलोग्राम पांच सौ रुपये दिया जाता था।
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