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साहित्यश्री अलंकरण से 12 रचनाकार सम्मानित
Updated Mon, 10 Dec 2018 02:00 AM IST
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वाराणसी। साहित्यिक संघ का 27वां वार्षिक अधिवेशन रविवार को पराड़कर भवन मैदागिन में मनाया गया। इस मौके पर 12 रचनाकारों को सेवक स्मृति साहित्य श्री अलंकरण से सम्मानित किया गया। इनमें रामवतार (गाजीपुर), डॉ. आशा शर्मा (जयपुर), डॉ. अलका प्रमोद (लखनऊ), डॉ. शोभनाथ शुक्ल (सुल्तानपुर), अशोक कुमार प्रजापति (पटना), रमेश गौतम (बरेली), देवेंद्र कुमार मिश्र (छिंदवाड़ा), वाराणसी के डॉ. अशोक कुमार सिंह, सुरेंद्र वाजपेयी, शिवकुमार पराग, विजय शंकर पांडेय, धर्मेंद्र गुप्त साहिल शामिल रहे। इन रचनाकारों ने महेंद्र नाथ मिश्र की स्मृति काव्य गोष्ठी में अपनी रचनाएं भी सुनाईं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कवि ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि उलझाव भरे इस जटिल समय में रचनाकारों का उत्तरदायित्व बढ़ गया है। हम जैसे-जैसे विकास की नई मंजिलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं, वैसे-वैसे सामाजिक जीवन में विसंगतियां, विषमताएं और भेदभाव मूलक प्रवृत्ति बढ़ रही है। विशिष्ट अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह, पीके दास, कथाकार डॉ. शोभनाथ शुक्ल, डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. दयानिधि मिश्र, डॉ. राजेश्वर आचार्य, डॉ. नीरजा माधव, डॉ. बेनी माधव, अर्जुन तिवारी, प्रो. श्रद्धानंद आदि ने भी विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. जयशीला पांडेय ने की। संस्था के प्रेरणास्रोत कवि ठाकुर प्रसाद सिंह, पंडित पारसनाथ मिश्र सेवक, महेंद्र नाथ मिश्र के चित्रों पर फूल चढ़ाने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। स्वागत जगदीश झुनझुनवाला ने किया। संचालन डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन पंडित पद्माकर चौबे ने किया। डॉ. विजयेंद्र नाथ मिश्र ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कवि ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि उलझाव भरे इस जटिल समय में रचनाकारों का उत्तरदायित्व बढ़ गया है। हम जैसे-जैसे विकास की नई मंजिलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं, वैसे-वैसे सामाजिक जीवन में विसंगतियां, विषमताएं और भेदभाव मूलक प्रवृत्ति बढ़ रही है। विशिष्ट अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह, पीके दास, कथाकार डॉ. शोभनाथ शुक्ल, डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. दयानिधि मिश्र, डॉ. राजेश्वर आचार्य, डॉ. नीरजा माधव, डॉ. बेनी माधव, अर्जुन तिवारी, प्रो. श्रद्धानंद आदि ने भी विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. जयशीला पांडेय ने की। संस्था के प्रेरणास्रोत कवि ठाकुर प्रसाद सिंह, पंडित पारसनाथ मिश्र सेवक, महेंद्र नाथ मिश्र के चित्रों पर फूल चढ़ाने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। स्वागत जगदीश झुनझुनवाला ने किया। संचालन डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन पंडित पद्माकर चौबे ने किया। डॉ. विजयेंद्र नाथ मिश्र ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
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