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शक्तिवर्धक दवाएं और जैकेट बनाने में आता है काम0
Updated Mon, 23 Apr 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। स्तनधारी प्राणी पैंगोलिन का शिकार इसके शरीर पर उभरे स्केल (केराटिन की बनी शल्कनुमा संरचना) के लिए किया जाता है। भारत में इसे सल्लू सांप भी कहा जाता है। इसकी मांग चीन, हांगकांग, सिंगापुर, मलेशिया आदि देशों में है। पैंगोलिन से शक्तिवर्धक दवाएं और जैकेट बनाए जाते हैं। इनका उपयोग बहुत सी बीमारियों के उपचार में मसलन मानव शरीर में होने वाले ब्लॉकेज को खोलने में होता है। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इसके स्किन स्केल से कैंसर जैसी बीमारी के उपचार में मदद मिल सकती है।
इससे पहले 20 जनवरी को मध्य प्रदेश के बालाघाट में जिंदा पैंगोलिन बरामद किया गया था। पूछताछ में सामने आया था कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जंगल तस्कर साथ मिलकर पैंगोलिन की तस्करी करते हैं और उनके तार नेपाल से जुड़े हुए हैं।
इंटरपोल की पिछले तीन साल की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में पैंगोलिन का सर्वाधिक अवैध व्यापार होता है। इसी वर्ष दक्षिण अफ्रीका में हुए अधिवेशन में दुनिया भर में पैंगोलिन की घटती संख्या पर चिंता जताई गई थी। चार फीट लंबा यह जीव बेहद शर्मीला होता है और चींटी व दीमक इसका मुख्य भोजन है। भारत में इसकी दो प्रजातियां पाई जाती हैं। पूर्वोत्तर भारत में चायनीज पैंगौलिन और अन्य राज्यों में इंडियन पैंगोलिन पाया जाता है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में मेहमानों के सामने पैंगोलिन की नुमाइश और फिर उसे काट कर मांस परोसे जाने का चलन है।
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इससे पहले 20 जनवरी को मध्य प्रदेश के बालाघाट में जिंदा पैंगोलिन बरामद किया गया था। पूछताछ में सामने आया था कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जंगल तस्कर साथ मिलकर पैंगोलिन की तस्करी करते हैं और उनके तार नेपाल से जुड़े हुए हैं।
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इंटरपोल की पिछले तीन साल की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में पैंगोलिन का सर्वाधिक अवैध व्यापार होता है। इसी वर्ष दक्षिण अफ्रीका में हुए अधिवेशन में दुनिया भर में पैंगोलिन की घटती संख्या पर चिंता जताई गई थी। चार फीट लंबा यह जीव बेहद शर्मीला होता है और चींटी व दीमक इसका मुख्य भोजन है। भारत में इसकी दो प्रजातियां पाई जाती हैं। पूर्वोत्तर भारत में चायनीज पैंगौलिन और अन्य राज्यों में इंडियन पैंगोलिन पाया जाता है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में मेहमानों के सामने पैंगोलिन की नुमाइश और फिर उसे काट कर मांस परोसे जाने का चलन है।
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