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असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति पहले से ही तय0
Updated Sat, 07 Apr 2018 02:36 AM IST
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वाराणसी। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत की गई है। यहां के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले एक अभ्यर्थी ने धांधली की आशंका जताते हुए यूजीसी, प्रधानमंत्री, कुलाधिपति और मुख्यमंत्री से अनियमितताओं की शिकायत करते हुए जांच की मांग की है।
असिस्टेंट प्रोफेसर के एक पद के लिए आवेदन करने वाले बीएचयू आईएमएस के मेडिसिन डिपार्टमेंट में यंग साइंटिस्ट डॉ. आलोक कुमार सिंह ने अपनी शिकायत में दो आवेदकों का नाम भी लिखा है। बताया है कि एक आवेदक ऐसा भी है, जिसके पिता चयन समिति में हैं। डॉ. सिंह का कहना है कि इस पद पर साक्षात्कार शनिवार को होना है। करीब दो दर्जन आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है।
डॉ. सिंह ने बताया कि साक्षात्कार के एक दिन पहले शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से उन्हें मिले ई-मेल में कहा गया है कि उनका पीजी इस विषय से नहीं है। उनका दावा है कि यूजीसी के नियमानुसार अगर किसी आवेदक ने बायोकेमिस्ट्री या माइक्रोबायोलॉजी में पीजी किया है तो वह बायोटेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अर्ह है। बावजूद इसके कुलसचिव का जवाब हैरत में डालता है।
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दूसरी ओर जब इस बारे में कुलपति प्रो. राजाराम यादव का फोन स्विच ऑफ मिला। कुलसचिव सुजीत जायसवाल से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्होंने बात करने में असमर्थता जताने का एसएमएस जरूर भेज दिया।
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असिस्टेंट प्रोफेसर के एक पद के लिए आवेदन करने वाले बीएचयू आईएमएस के मेडिसिन डिपार्टमेंट में यंग साइंटिस्ट डॉ. आलोक कुमार सिंह ने अपनी शिकायत में दो आवेदकों का नाम भी लिखा है। बताया है कि एक आवेदक ऐसा भी है, जिसके पिता चयन समिति में हैं। डॉ. सिंह का कहना है कि इस पद पर साक्षात्कार शनिवार को होना है। करीब दो दर्जन आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है।
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डॉ. सिंह ने बताया कि साक्षात्कार के एक दिन पहले शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से उन्हें मिले ई-मेल में कहा गया है कि उनका पीजी इस विषय से नहीं है। उनका दावा है कि यूजीसी के नियमानुसार अगर किसी आवेदक ने बायोकेमिस्ट्री या माइक्रोबायोलॉजी में पीजी किया है तो वह बायोटेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अर्ह है। बावजूद इसके कुलसचिव का जवाब हैरत में डालता है।
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दूसरी ओर जब इस बारे में कुलपति प्रो. राजाराम यादव का फोन स्विच ऑफ मिला। कुलसचिव सुजीत जायसवाल से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्होंने बात करने में असमर्थता जताने का एसएमएस जरूर भेज दिया।