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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य चयन की प्रक्रिया जारी
Updated Tue, 06 Feb 2018 01:48 AM IST
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वाराणसी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक करा चुके विद्वानों को झटका लग सकता है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद के विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। हाइकोर्ट की ओर से चयन के लिए नामित संस्था भारत धर्म महामंडल के अधिकारियों का कहना है कि शंकराचार्य के चयन की प्रक्रिया अभी चल रही है। जबलपुर में शंकराचार्य पद पर अभिषेक करने वाले सभी लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया गया है।
महामंडल के जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय ने बताया कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य चयन के लिए कोर्ट द्वारा निर्धारित 22 दिसंबर की तिथि समाप्त होने के बाद हम लोग इस मामले में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने अभी समय विस्तारित नहीं किया है। सुनवाई होते ही नए शंकराचार्य के चयन की घोषणा कर दी जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बताया, मठाम्नाय अनुशासन में स्पष्ट उल्लेख है कि एक पीठ पर एक ही आचार्य का अभिषेक किया जा सकता है।
उपाध्याय ने डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की बैठक की कार्यवाही को गलत बताते हुए इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी थी। उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर कहा था कि 22 सितंबर को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के लिए दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए किसी पीठासीन जज या सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की जाए, ताकि निष्पक्ष तरीके से शंकराचार्य का चयन कराया जा सके।
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महामंडल के जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय ने बताया कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य चयन के लिए कोर्ट द्वारा निर्धारित 22 दिसंबर की तिथि समाप्त होने के बाद हम लोग इस मामले में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने अभी समय विस्तारित नहीं किया है। सुनवाई होते ही नए शंकराचार्य के चयन की घोषणा कर दी जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बताया, मठाम्नाय अनुशासन में स्पष्ट उल्लेख है कि एक पीठ पर एक ही आचार्य का अभिषेक किया जा सकता है।
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उपाध्याय ने डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की बैठक की कार्यवाही को गलत बताते हुए इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी थी। उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर कहा था कि 22 सितंबर को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के लिए दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए किसी पीठासीन जज या सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की जाए, ताकि निष्पक्ष तरीके से शंकराचार्य का चयन कराया जा सके।
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