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हर हाथ को काम देने में महकमा फेल
Updated Fri, 19 Jan 2018 01:33 AM IST
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ज्ञानपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना से हर हाथ को काम देने में महकमा फेल साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष में नौ लाख के सापेक्ष अब तक छह लाख ही मानव दिवस सृजित हो सका है। वहीं, 40 प्रतिशत पक्के कार्य के बजाए मात्र 16 फीसदी ही काम हो पाया है। विभाग इसके पीछे जांच पड़ताल की पेंच को मुख्य कारण मान रहा है।
ग्रामीण अंचलों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना को लागू किया था। इसमें गरीब परिवारों को 100 दिन काम दिलाया जाना था। मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये मजदूरी भी देने का प्रावधान है। जिले में करीब एक दशक पूर्व शुरू हुई योजना धरातल पर प्रभावी होती नहीं दिख रही है। हर हाथ को काम दिलाने के लिए मनरेगा का मानक तय है कि 60 फीसदी कच्चा तो 40 फीसदी पक्का कार्य होना है। शासन के निर्देश के बाद भी पक्के और कच्चे दोनों तरह के काम कराने में विभाग फेल साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के छह ब्लॉकों में नौ लाख मानव रोजगार दिवस सृजित करना था लेकिन अब तक मात्र छह लाख ही मानव दिवस सृजित हो सके हैं। कच्चे काम में 60 की बजाए 40 फीसदी और पक्के में 40 के बजाए 16 फीसदी ही काम हुए हैं। बताते चलें कि मनरेगा में एक लाख 12 हजार जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 45 हजार के हाथ में काम मिल पाता है। विभाग की मानें तो वर्तमान में पक्के निर्माण में आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल की बाउंड्री समेत करीब 20 लाख से अधिक का कार्य हो रहा हैं, जबकि कच्चे कार्यों में तालाबों का सुंदरीकरण, मेड़बंदी, मोरवा की सफाई का काम चल रहा है। श्रमायुक्त मनरेगा अजीत सिंह ने कहा कि मनरेगा में अधिक लोगों को रोजगार देने पर जोर दिया जा रहा है।
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ग्रामीण अंचलों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना को लागू किया था। इसमें गरीब परिवारों को 100 दिन काम दिलाया जाना था। मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये मजदूरी भी देने का प्रावधान है। जिले में करीब एक दशक पूर्व शुरू हुई योजना धरातल पर प्रभावी होती नहीं दिख रही है। हर हाथ को काम दिलाने के लिए मनरेगा का मानक तय है कि 60 फीसदी कच्चा तो 40 फीसदी पक्का कार्य होना है। शासन के निर्देश के बाद भी पक्के और कच्चे दोनों तरह के काम कराने में विभाग फेल साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के छह ब्लॉकों में नौ लाख मानव रोजगार दिवस सृजित करना था लेकिन अब तक मात्र छह लाख ही मानव दिवस सृजित हो सके हैं। कच्चे काम में 60 की बजाए 40 फीसदी और पक्के में 40 के बजाए 16 फीसदी ही काम हुए हैं। बताते चलें कि मनरेगा में एक लाख 12 हजार जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 45 हजार के हाथ में काम मिल पाता है। विभाग की मानें तो वर्तमान में पक्के निर्माण में आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल की बाउंड्री समेत करीब 20 लाख से अधिक का कार्य हो रहा हैं, जबकि कच्चे कार्यों में तालाबों का सुंदरीकरण, मेड़बंदी, मोरवा की सफाई का काम चल रहा है। श्रमायुक्त मनरेगा अजीत सिंह ने कहा कि मनरेगा में अधिक लोगों को रोजगार देने पर जोर दिया जा रहा है।
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