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Varanasi News: फर्जी एप से शेयर मार्केट में निवेश कराकर 20 लाख रुपये हड़पे

Fri, 16 Feb 2024 04:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Feb 2024 04:04 AM IST
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20 lakh rupees were grabbed by investing in share market through fake app
वाराणसी। गांधी नगर, नरिया निवासी जय प्रकाश शर्मा की पत्नी वंदना राय से फर्जी एप के जरिये शेयर मार्केट में निवेश करा कर 20 लाख रुपये हड़प लिया गया। वंदना की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। वंदना ने पुलिस को बताया कि वह गृहिणी हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप में उनके पति के मोबाइल नंबर को जोड़ा गया। उस ग्रुप में शेयर बाजार से संबंधित चर्चा होती थी। ग्रुप एडमिन के कहने पर सदस्यों ने पैंथ-55 एप डाउनलोड किया। एप में शुरुआत में 50 हजार रुपये ब्याज फ्री दिया गया। उसे ट्रेड करने को कहा गया और बताया गया कि मुनाफे को आप अपने खाते में ले सकते हैं। पहले उनके पति ने उस एप से ट्रेड किया। फिर उन्होंने भी ट्रेडिंग शुरू की। कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने सास के नाम से भी एप डाउनलोड किया। इसके बाद एप में आईपीओ भी अलॉट किया गया, जिसके लिए उन्होंने 7.50 लाख रुपये जमा किए। फिर दूसरा आईपीओ भी लगभग 36 लाख रुपये का अलॉट किया गया। इस पर एप से संबंधित लोगों ने पैसा ब्लॉक कर दिया। इस पर शक हुआ तो पता लगाने पर सामने आया कि एप फर्जी है।
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शेयर मार्केट में निवेश करा कर लगाई 8.75 लाख की चपत
वाराणसी। शेयर मार्केट में निवेश करा कर अवलेशपुर निवासी प्रदीप सिंह से 8,75,000 रुपये की धोखाधड़ी की गई। साइबर क्राइम पुलिस थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रदीप सिंह ने पुलिस को बताया कि वह फेसबुक लिंक के माध्यम से एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हुए थे। उसका नाम ब्लैकरक इक्विटी एसेट मैनेजमेंट ग्रुप था। ग्रुप शेयर मार्केट पर ऑनलाइन क्लास के माध्यम से शिक्षा प्रदान करता है। क्लास प्रोफेसर जोनाथन और एडवर्ड स्मिथ नाम के व्यक्ति लेते थे। उन्होंने पेशेवर संस्थागत खाता खोलने के लिए कहा, जिसमें खरीदने-बेचने और सदस्यता लेने में अन्य बाजार प्रतिभागियों पर प्राथमिकता हो। उन्होंने एक लिंक के माध्यम से जोनाथन स्कूल ऑफ बिजनेस के सेबी प्रश्नावली दिखाते हुए गूगल फॉर्म भरने को कहा। हर किसी को एक एप पर खाता खोलने के लिए कहा गया और एक व्हाट्स एप नंबर पर ब्लैकरक ऑनलाइन ग्राहक सेवा शुरू की गई। उन्होंने दो आईपीओ के लिए आवेदन किया। पहले आईपीओ के लिए फंड की व्यवस्था की गई। जब दूसरे आईपीओ के लिए भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की तो बताया गया कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि पहले आईपीओ बेचें फिर लगभग 400000 रुपये जमा करें। जब उन्होंने अपने आईपीओ शेयर बेचें और निकासी का विकल्प चुना, तो उन्होंने पहले 947000 का ऋण चुकाने के लिए कहा। जब उनसे अपने शेष राशि से राशि समायोजित करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं है। उन्होंने 875000 रुपए ट्रांसफर कर दिए हैं और उसके बदले उन्हें कुछ नहीं मिला।
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