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...ऐसे रमेश हमारी माटी की शान हैं
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वाराणसी। ‘मौत के बाद भी जिनके नाम में जान हैं, ऐसे रमेश हमारी माटी की शान हैं...।’ शनिवार को शहीद रमेश यादव के परिजन, ग्रामीण और क्षेत्र के लोग इसी भाव से गर्व से भरे दिखे। हाथों तिरंगे के साथ अंतिम यात्रा में शामिल अपार जनसमूह जितना दुखी था, उससे कहीं ज्यादा पाकिस्तान और आतंकियों के खिलाफ गुस्सा था। भारत माता की जय और शहीद रमेश अमर रहें उद्घोष और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से तोफापुर सहित आसपास के गांव घंटों गूंजते रहे।
सीआरपीएफ के जवान प्रयागराज से शहीद रमेश का पार्थिव शरीर लेकर तोफापुर स्थित उनके घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। पत्नी रेनू, मां राजमती देवी और बहन सरोजा को संभालना गांव की महिलाओं के लिए मुश्किल हो गया। वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। ग्रामीणों के साथ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी, सीआरपीएफ के जवान और मौजूद राजनेता अपनी आंखों से आंसू पोंछते नजर आए। इन सबके बीच रमेश के पिता श्याम नारायण कभी अपने मासूम पोते आयुष को देख रहे थे तो कभी पत्नी, बेटी और बहू को ढांढस बंधा रहे थे। 10:25 बजे रमेश की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो जाल्हूपुर बाजार, भगतुआ बाजार होते हुए आठ किलोमीटर लंबा फासला तय कर 3:30 बजे सरसौल बलुआ घाट पहुंची। सशस्त्र सलामी के बाद पिता श्याम नारायण ने मुखाग्नि दी तो फिर शहीद रमेश अमर रहें का उद्घोष होने लगा।
स्कूली बच्चों ने बरसाए फूल
शहीद रमेश की शवयात्रा के दौरान आठ किलोमीटर लंबे फासले में जगह-जगह सड़क के दोनों तरफ स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लिए खड़े हुए थे। शहीद को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही शहीद रमेश अमर रहें और जब तक सूरज-चांद रहेगा रमेश तुम्हारा नाम रहेगा के नारे लगा रहे थे।
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सीआरपीएफ के जवान प्रयागराज से शहीद रमेश का पार्थिव शरीर लेकर तोफापुर स्थित उनके घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। पत्नी रेनू, मां राजमती देवी और बहन सरोजा को संभालना गांव की महिलाओं के लिए मुश्किल हो गया। वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। ग्रामीणों के साथ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी, सीआरपीएफ के जवान और मौजूद राजनेता अपनी आंखों से आंसू पोंछते नजर आए। इन सबके बीच रमेश के पिता श्याम नारायण कभी अपने मासूम पोते आयुष को देख रहे थे तो कभी पत्नी, बेटी और बहू को ढांढस बंधा रहे थे। 10:25 बजे रमेश की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो जाल्हूपुर बाजार, भगतुआ बाजार होते हुए आठ किलोमीटर लंबा फासला तय कर 3:30 बजे सरसौल बलुआ घाट पहुंची। सशस्त्र सलामी के बाद पिता श्याम नारायण ने मुखाग्नि दी तो फिर शहीद रमेश अमर रहें का उद्घोष होने लगा।
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स्कूली बच्चों ने बरसाए फूल
शहीद रमेश की शवयात्रा के दौरान आठ किलोमीटर लंबे फासले में जगह-जगह सड़क के दोनों तरफ स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लिए खड़े हुए थे। शहीद को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही शहीद रमेश अमर रहें और जब तक सूरज-चांद रहेगा रमेश तुम्हारा नाम रहेगा के नारे लगा रहे थे।
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