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सद्गुरु और संत प्रवर के आशीर्वाद के लिए उमड़ी भीड़
Updated Sat, 15 Dec 2018 01:56 AM IST
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चौबेपुर। स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आयोजित विहंगम योग समारोह एवं 5101 कुंडीय महायज्ञ का समापन सद्गुरु देव और संत प्रवर के आशीर्वाद से हुआ।
अपने आशीर्वचन में सद्गुरु आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज ने कहा कि भक्ति आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है। आज की भक्ति अज्ञान आडंबरयुक्त भक्ति है। इससे ऊपर उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जैसे कमल का पत्ता जल से ही उत्पन्न होता है और जल में ही रहता है पर वह जल से लिप्त नहीं होता। ऐसे ही एक विहंगम योगी संसार में रहते हुए संसार के कार्यों को करते हुए भी इससे निर्लिप्त रहता है। संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि विहंगम योग स्वास्थ्य, सुख और शांति का संगम है। यह सेवा, सत्संग और साधना की त्रिवेणी है। विहंगम योग का ध्यान आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। एक साधक जब अपनी चेतना को गुरु उपदिष्ट भूमि पर केंद्रित करता है तो वह मानसिक व आत्मिक शांति का अनुभव करता है। मन पर नियंत्रण न होने से ही समाज में तमाम विसंगतियां फैली हैं। इस महायज्ञ में आये अनुयाई स्वर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भजन गायक नीरज पांडेय, रवि शारदा, गायिका रंजू सिंह ने भजनों की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का समापन वंदना, आरती एवं शांति पाठ के द्वारा किया गया। समापन के पश्चात अनुयाइयों ने सदगुरु देव एवं संत प्रवर के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए।
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अपने आशीर्वचन में सद्गुरु आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज ने कहा कि भक्ति आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है। आज की भक्ति अज्ञान आडंबरयुक्त भक्ति है। इससे ऊपर उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जैसे कमल का पत्ता जल से ही उत्पन्न होता है और जल में ही रहता है पर वह जल से लिप्त नहीं होता। ऐसे ही एक विहंगम योगी संसार में रहते हुए संसार के कार्यों को करते हुए भी इससे निर्लिप्त रहता है। संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि विहंगम योग स्वास्थ्य, सुख और शांति का संगम है। यह सेवा, सत्संग और साधना की त्रिवेणी है। विहंगम योग का ध्यान आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। एक साधक जब अपनी चेतना को गुरु उपदिष्ट भूमि पर केंद्रित करता है तो वह मानसिक व आत्मिक शांति का अनुभव करता है। मन पर नियंत्रण न होने से ही समाज में तमाम विसंगतियां फैली हैं। इस महायज्ञ में आये अनुयाई स्वर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भजन गायक नीरज पांडेय, रवि शारदा, गायिका रंजू सिंह ने भजनों की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का समापन वंदना, आरती एवं शांति पाठ के द्वारा किया गया। समापन के पश्चात अनुयाइयों ने सदगुरु देव एवं संत प्रवर के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए।
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