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शिक्षा से ही बढ़ेगी महिलाओं की ताकत
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:12 AM IST
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भदोही। बीते एक दशक में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काफी काम हुआ है। महिला शिक्षा, सुरक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाएं हैं। इसके बाद भी महिला सशक्तीकरण के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह कहना है भदोही की ऐसी महिलाओं का, जिन्होंने अपने दम पर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। साथ ही समाज को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुनीता यादव ने कहा कि समाज में महिलाओं का बराबर का अधिकार है। वे पुरुषों से कहीं से भी कमतर नहीं है। पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं महिलाओं का उत्साहवर्धन किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को बालिका शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त करनी चाहिए। मदर टेरेसा महिला जागरूक मंच की संस्थापिका संगीता खन्ना मानती हैं कि सर्वप्रथम महिला शिक्षा पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षा से ही महिलाओं की ताकत बढ़ेगी। महिला शिक्षित होगी तो वह अपने अधिकार जानेगी। सरकार को चाहिए कि महिला दिवस पर जनपद या मंडल स्तर पर महिलाओं को सम्मानित करे ताकि उनका उत्साहवर्धन हो।
वुडवर्ड पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी मेहरा मानती हैं कि कमी हमारे परिवारों में है, जो महिलाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अकेला नहीं छोड़ते। आज अनगिनत महिलाएं सरपंच और पार्षद जैसे पदों पर होते हुए भी अपने पति के आगे बेबस हैं। नगर की चिकित्सक डॉ. सुषमा बरनवाल कहती हैं कि अंतराष्ट्रीय महिला दिवस हमारे समाज में खास महत्व नहीं बन सका है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी नहीं आ सकी है। हाई प्रोफाइल मामलो को छेड़ दें तो बाकी मामलों में अपराधियों को सजा भी नहीं हो पाती। इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए।
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पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुनीता यादव ने कहा कि समाज में महिलाओं का बराबर का अधिकार है। वे पुरुषों से कहीं से भी कमतर नहीं है। पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं महिलाओं का उत्साहवर्धन किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को बालिका शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त करनी चाहिए। मदर टेरेसा महिला जागरूक मंच की संस्थापिका संगीता खन्ना मानती हैं कि सर्वप्रथम महिला शिक्षा पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षा से ही महिलाओं की ताकत बढ़ेगी। महिला शिक्षित होगी तो वह अपने अधिकार जानेगी। सरकार को चाहिए कि महिला दिवस पर जनपद या मंडल स्तर पर महिलाओं को सम्मानित करे ताकि उनका उत्साहवर्धन हो।
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वुडवर्ड पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी मेहरा मानती हैं कि कमी हमारे परिवारों में है, जो महिलाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अकेला नहीं छोड़ते। आज अनगिनत महिलाएं सरपंच और पार्षद जैसे पदों पर होते हुए भी अपने पति के आगे बेबस हैं। नगर की चिकित्सक डॉ. सुषमा बरनवाल कहती हैं कि अंतराष्ट्रीय महिला दिवस हमारे समाज में खास महत्व नहीं बन सका है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी नहीं आ सकी है। हाई प्रोफाइल मामलो को छेड़ दें तो बाकी मामलों में अपराधियों को सजा भी नहीं हो पाती। इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए।
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