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75 हजार भवनों से भी वसूला जाएगा गृहकर
Updated Tue, 06 Feb 2018 01:52 AM IST
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वाराणसी। नगर निगम अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए अब नगरीय सीमा में बने भवनों का जीआई सर्वे कराएगा। साथ ही नगर निगम दस्तावेजों एवं दाखिल खारिज को भी ऑनलाइन करने का काम मार्च से शुरू करने जा रहा है। ताकि नागरिकों को नगरीय सीमा में बने भवनों एवं दाखिल खारिज की जानकारी एक क्लिक में मिल सके। नौ फरवरी को टेेंडर की प्रक्रिया पूरी कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। जीआई सर्वे के बाद करीब 75 हजार और भवनों से गृहकर वसूला जाएगा। इससे नगर निगम को लगभग 20 करोड़ रुपये राजस्व का लाभ होगा।
दरअसल नगर निगम के रिकार्ड में 1.85 लाख भवन चिह्नित हैं। लेकिन 1.10 लाख भवनों से ही गृहकर की वसूली हो पाती है। जबकि भवनों की संख्या दो लाख के पार हो चुकी है। इससे नगर निगम का नुकसान हो रहा है। इसके लिए सर्वे कर भवनों की संख्या का पता लगाकर शत-प्रतिशत गृहकर वसूली की जाएगी। जीआई सर्वे और दाखिल खारिज ऑनलाइन करने पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नौ फरवरी को टेंडर कर इस काम में तेजी लाई जाएगी। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि इसका उद्देश्य दस्तावेजों में हेराफेरी को रोकने और पारदर्शिता लाने के अलावा राजस्व बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि बीएचयू पर 30 करोड़ का गृहकर कई साल से बाकी है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भुगतान नहीं किया जा रहा है। 31 मार्च से पहले बकाया जमा नहीं किया गया तो खाते सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
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दरअसल नगर निगम के रिकार्ड में 1.85 लाख भवन चिह्नित हैं। लेकिन 1.10 लाख भवनों से ही गृहकर की वसूली हो पाती है। जबकि भवनों की संख्या दो लाख के पार हो चुकी है। इससे नगर निगम का नुकसान हो रहा है। इसके लिए सर्वे कर भवनों की संख्या का पता लगाकर शत-प्रतिशत गृहकर वसूली की जाएगी। जीआई सर्वे और दाखिल खारिज ऑनलाइन करने पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नौ फरवरी को टेंडर कर इस काम में तेजी लाई जाएगी। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि इसका उद्देश्य दस्तावेजों में हेराफेरी को रोकने और पारदर्शिता लाने के अलावा राजस्व बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि बीएचयू पर 30 करोड़ का गृहकर कई साल से बाकी है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भुगतान नहीं किया जा रहा है। 31 मार्च से पहले बकाया जमा नहीं किया गया तो खाते सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
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