{"_id":"59a723154f1c1b07278b4887","slug":"191504125717-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोलह गांठों के धागे संग महिलाओं ने लिया व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोलह गांठों के धागे संग महिलाओं ने लिया व्रत
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। सोरहिया मेले के दूसरे दिन बुधवार को लक्ष्मी कुंड स्थित मंदिर में मां लक्ष्मी का भव्य शृंगार हुआ। सोलह गांठों के धागे से महालक्ष्मी की पूजा का व्रत रखने वाली महिलाओं ने सविधि दर्शन-पूजन के साथ मां की आराधना की। सोलह दिन चलने वाला यह व्रत जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ पूरा होगा। व्रती महिलाएं कच्ची मिट्टी की मां लक्ष्मी की प्रतिमा घर में स्थापित कर 16 दिनी पूजन-अनुष्ठान शुरू कर चुकी हैं।
बुधवार को लक्ष्मीकुंड में शृंगार के बाद मां के दर्शन-पूजन के लिए व्रती महिलाआें का तांता लग गया। पूजन-आराधना के साथ ही लक्ष्मीकुंड स्थित मंदिर के आसपास स्थित दुकानों से प्रतिमाएं भी खरीदी गईं। यहां मंदिर के पीछे कुंड है। इसके बाद मां सोरहिया का मंदिर है। जहां व्रत के दौरान लगातार 16 दिन मां का दर्शन करने की मान्यता है। पंडित शिव प्रसाद पांडेय की देखरेख में यहां पूजा-पाठ शुरू हो गया है। सुबह मंगला आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मां को नारियल-चुनरी चढ़ाने अर्पित करने के लिए होड़ मची रही। दोपहर में भोग आरती और रात में शयन आरती तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहा। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और बिजली के झालरों से सजाया गया है। मान्यता है कि धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की इस सोलह दिनी व्रत-आराधना से कभी धन की कमी नहीं होती है। मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
बुधवार को लक्ष्मीकुंड में शृंगार के बाद मां के दर्शन-पूजन के लिए व्रती महिलाआें का तांता लग गया। पूजन-आराधना के साथ ही लक्ष्मीकुंड स्थित मंदिर के आसपास स्थित दुकानों से प्रतिमाएं भी खरीदी गईं। यहां मंदिर के पीछे कुंड है। इसके बाद मां सोरहिया का मंदिर है। जहां व्रत के दौरान लगातार 16 दिन मां का दर्शन करने की मान्यता है। पंडित शिव प्रसाद पांडेय की देखरेख में यहां पूजा-पाठ शुरू हो गया है। सुबह मंगला आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मां को नारियल-चुनरी चढ़ाने अर्पित करने के लिए होड़ मची रही। दोपहर में भोग आरती और रात में शयन आरती तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहा। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और बिजली के झालरों से सजाया गया है। मान्यता है कि धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की इस सोलह दिनी व्रत-आराधना से कभी धन की कमी नहीं होती है। मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन