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विश्व में अब आध्यात्मिक क्रांति की जरूरत : दलाईलामा 0
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:07 AM IST
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वाराणसी।
तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि विश्व में अब आध्यात्मिक क्रांति की जरूरत है। आध्यात्मिकता से ही विश्व में सौहार्द और शांति लाई जा सकती है। यह आध्यात्मिक क्रांति विश्वास के आधार पर नहीं बल्कि चिंतन-मनन और विश्लेषण के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि विश्वास के आधार पर आध्यात्मिकता अंधविश्वास को जन्म देती है।
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में मंगलवार को भारतीय विश्वविद्यालय संघ के 92वें अधिवेशन के दूसरे दिन दलाईलामा ने ये बातें कुलपतियों के संवाद सत्र में कहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मूल स्वरूप करुणामय है और इसे वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है। हमारी आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने इस स्वरूप में बदलाव किया है। करुणा के विकास का मार्ग वैज्ञानिक और शोध के आधार पर होना चाहिए। शमथ और विपश्यना को अकादमिक विषयों में शामिल करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि पारंपरिक ज्ञान को पुनर्स्थापित किया जाए। उसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाहित किया जाए। भारत में आज भी जातिवाद और असमानता की जड़ें मजबूत हैं। इसे खत्म करने के लिए धर्मगुरुओं को आगे आना होगा। मानव मूल्य की शिक्षा से ही ये समस्याएं हल होंगी।
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तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि विश्व में अब आध्यात्मिक क्रांति की जरूरत है। आध्यात्मिकता से ही विश्व में सौहार्द और शांति लाई जा सकती है। यह आध्यात्मिक क्रांति विश्वास के आधार पर नहीं बल्कि चिंतन-मनन और विश्लेषण के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि विश्वास के आधार पर आध्यात्मिकता अंधविश्वास को जन्म देती है।
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में मंगलवार को भारतीय विश्वविद्यालय संघ के 92वें अधिवेशन के दूसरे दिन दलाईलामा ने ये बातें कुलपतियों के संवाद सत्र में कहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मूल स्वरूप करुणामय है और इसे वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है। हमारी आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने इस स्वरूप में बदलाव किया है। करुणा के विकास का मार्ग वैज्ञानिक और शोध के आधार पर होना चाहिए। शमथ और विपश्यना को अकादमिक विषयों में शामिल करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि पारंपरिक ज्ञान को पुनर्स्थापित किया जाए। उसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाहित किया जाए। भारत में आज भी जातिवाद और असमानता की जड़ें मजबूत हैं। इसे खत्म करने के लिए धर्मगुरुओं को आगे आना होगा। मानव मूल्य की शिक्षा से ही ये समस्याएं हल होंगी।
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