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भक्तों ने बाबा संग खेली गुलाल की होली
Updated Tue, 27 Feb 2018 01:20 AM IST
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ज्ञानपुर/गोपीगंज। रंगभरी एकादशी के अवसर पर सोमवार को जिले के शिवालय हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठे। माता पार्वती से विवाह के बाद होली से चार दिन पूर्व देवाधिदेव महादेव के काशी पहुंचने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस पर्व पर जिले के शिवालय सुबह से लेकर देर रात तक शिवभक्तों की भीड़ से गुलजार रहे। वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारे से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस दौरान शिवालय लकदक सजाए गए।
होली के चार दिन पूर्व रंगभरी एकादशी पर पर्व को लेकर सोमवार को नगर सहित आसपास के शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन, भजन-कीर्तन का कार्यक्रम सुबह से लेकर शाम तक चलता रहा। इस दौरान शिवभक्तों का जमावड़ा लगा रहा। सिद्धपीठ हरिहरनाथ मंदिर में भोलेनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके बाद पूजन-अर्चन का सिलसिला चला। भक्तों ने अबीर और गुलाल उड़ाए। मान्यता है कि माता पार्वती से विवाह के बाद महादेव रंगभरी एकादशी के दिन काशी पधारे थे। तभी से होली के चार दिनों पूर्व से ही रंगभरी एकादशी के दिन शिवालयों में गुलाल उड़ाकर होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है।
गोपीगंज संवाददाता के मुताबिक रंगभरी एकादशी को लेकर नगर के बाबा बड़े शिव मंदिर, गोपेश्वर नाथ मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बाबा कबूतर नाथ मंदिर के अलावा ग्रामीण अंचलों के लालानगर स्थित शिव मंदिर, कोल्हापुर पांडवा नाथ मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला सुबह से लेकर देर शाम तक चलता रहा। पर्व को लेकर नगर के बाबा बड़े शिव का भव्य श्रृंगार और मंदिर की आकर्षक सजावट की गई, जिसको लेकर शिवभक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। भक्तों ने भगवान शिव का पूजन अर्चन कर पुण्यलाभ अर्जित किया। वहीं पर्व को लेकर नगर के शिवालयों के अलावा कई स्थानों पर भांग ठंडाई का भी वितरण कराया गया। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर रामकरण, प्रभारी निरीक्षक गोपीगंज सुनील वर्मा सहित अन्य अधिकारी जायजा लेते रहे।
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होली के चार दिन पूर्व रंगभरी एकादशी पर पर्व को लेकर सोमवार को नगर सहित आसपास के शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन, भजन-कीर्तन का कार्यक्रम सुबह से लेकर शाम तक चलता रहा। इस दौरान शिवभक्तों का जमावड़ा लगा रहा। सिद्धपीठ हरिहरनाथ मंदिर में भोलेनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके बाद पूजन-अर्चन का सिलसिला चला। भक्तों ने अबीर और गुलाल उड़ाए। मान्यता है कि माता पार्वती से विवाह के बाद महादेव रंगभरी एकादशी के दिन काशी पधारे थे। तभी से होली के चार दिनों पूर्व से ही रंगभरी एकादशी के दिन शिवालयों में गुलाल उड़ाकर होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है।
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गोपीगंज संवाददाता के मुताबिक रंगभरी एकादशी को लेकर नगर के बाबा बड़े शिव मंदिर, गोपेश्वर नाथ मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बाबा कबूतर नाथ मंदिर के अलावा ग्रामीण अंचलों के लालानगर स्थित शिव मंदिर, कोल्हापुर पांडवा नाथ मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला सुबह से लेकर देर शाम तक चलता रहा। पर्व को लेकर नगर के बाबा बड़े शिव का भव्य श्रृंगार और मंदिर की आकर्षक सजावट की गई, जिसको लेकर शिवभक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। भक्तों ने भगवान शिव का पूजन अर्चन कर पुण्यलाभ अर्जित किया। वहीं पर्व को लेकर नगर के शिवालयों के अलावा कई स्थानों पर भांग ठंडाई का भी वितरण कराया गया। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर रामकरण, प्रभारी निरीक्षक गोपीगंज सुनील वर्मा सहित अन्य अधिकारी जायजा लेते रहे।
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