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असि की मुक्ति के लिए 18 संगठनों ने बुलंद की आवाज
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:46 AM IST
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काशी की पौराणिक पहचान से जुड़ी असि नदी की मुक्ति के लिए सोमवार को बड़े जनांदोलन की पृष्ठभूमि तैयार हो गई। संगम के अलावा, तीर्थों, मंदिरों को मिटाकर कई जगह पाटी गई नदी की रक्षा के लिए 18 से अधिक संगठनों के अलावा छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवाज बुलंद की है।
साझा संस्कृति मंच और असि नदी मुक्ति अभियान की अगुवाई में जन संगठनों की ओर से तय किए गए इस पहले संघर्ष की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम हस्ताक्षर अभियान के रूप में अर्थ डे की पूर्व संध्या पर 21 अप्रैल की शाम महामना मदन मोहन मालवीय की कर्मस्थली बीएचयू के सिंहद्वार से होगी। इसे कामयाब बनाने के लिए संगठनों ने संपर्क अभियान चलाना शुरू दिया है।
आठ किमी लंबी असि नदी को पाट कर आवासीय कॉलोनियां बसाने और नगर निगम, जल संस्थान जैसे सरकारी विभागों की अनदेखी से सीवर लाइन जोड़कर उसे नाले में तब्दील किए जाने के खिलाफ ‘अमर उजाला’ की मुहिम जन आंदोलन के रूप में तब्दील होने लगी है। महिला अधिकारों, असंगठित कामगारों और बाल मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले जन संगठनों के संयुक्त मंच साझा संस्कृति मंच और असि मुक्ति अभियान के बैनर तले असि के उद्धार की रणनीति तैयार की गई है।
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इस अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पांडेय का कहना है कि असि-वरुणा के बिना वाराणसी की कल्पना नहीं की जा सकती। असि की रक्षा के लिए ठोस उपाय हो सकें, इसके लिए हम केंद्र और प्रदेश की सरकारों का ध्यान मजबूती से खींचना चाहते हैं। इसके लिए गुरुवार की शाम चार से छह बजे तक बीएचयू सिंहद्वार पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। एक बड़े फ्लेक्स पर असि की मुक्ति से लिए सुझाव सहित हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे। उसी दिन इस आंदोलन से जुड़े साथियों की बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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साझा संस्कृति मंच और असि नदी मुक्ति अभियान की अगुवाई में जन संगठनों की ओर से तय किए गए इस पहले संघर्ष की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम हस्ताक्षर अभियान के रूप में अर्थ डे की पूर्व संध्या पर 21 अप्रैल की शाम महामना मदन मोहन मालवीय की कर्मस्थली बीएचयू के सिंहद्वार से होगी। इसे कामयाब बनाने के लिए संगठनों ने संपर्क अभियान चलाना शुरू दिया है।
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आठ किमी लंबी असि नदी को पाट कर आवासीय कॉलोनियां बसाने और नगर निगम, जल संस्थान जैसे सरकारी विभागों की अनदेखी से सीवर लाइन जोड़कर उसे नाले में तब्दील किए जाने के खिलाफ ‘अमर उजाला’ की मुहिम जन आंदोलन के रूप में तब्दील होने लगी है। महिला अधिकारों, असंगठित कामगारों और बाल मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले जन संगठनों के संयुक्त मंच साझा संस्कृति मंच और असि मुक्ति अभियान के बैनर तले असि के उद्धार की रणनीति तैयार की गई है।
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इस अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पांडेय का कहना है कि असि-वरुणा के बिना वाराणसी की कल्पना नहीं की जा सकती। असि की रक्षा के लिए ठोस उपाय हो सकें, इसके लिए हम केंद्र और प्रदेश की सरकारों का ध्यान मजबूती से खींचना चाहते हैं। इसके लिए गुरुवार की शाम चार से छह बजे तक बीएचयू सिंहद्वार पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। एक बड़े फ्लेक्स पर असि की मुक्ति से लिए सुझाव सहित हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे। उसी दिन इस आंदोलन से जुड़े साथियों की बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।