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रविदास जयंती पर होगा मंदिर विस्तारीकरण का शिलान्यास
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वाराणसी। संत रविदास जयंती पर सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास मंदिर विस्तारीकरण परियोजना का शिलान्यास होगा। इसके लिए पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। परियोजना के पहले चरण में 10 एकड़ जमीन में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंदिर विस्तारीकरण परियोजना पर अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लखनऊ में बैठक करेंगे। इसके लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने मंदिर परिक्षेत्र को विकसित करने के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे में संत रविदास मंदिर विस्तारीकरण परियोजना का शिलान्यास कराया जा सकता है। इसकी तैयारियों को लेकर सोमवार को निर्णय लिया जाएगा। विकास प्राधिकरण की ओर से पहले चरण में लंगर हाल और डॉरमेट्री सहित श्रद्धालु सुविधाओं को विकसित किए जाने की योजना है। इसके साथ ही मंदिर विस्तार के लिए 100 एकड़ जमीन अधिग्रहण की योजना है। इसमें यज्ञ शाला, धर्मशाला, पार्किंग, कमरे व हाल बनाने की योजना है। फिलहाल विकास प्राधिकरण पहले चरण में आठ एकड़ जमीन अधिग्रहित करेगा और दो एकड़ जमीन मंदिर प्रबंधन के पास उपलब्ध है। सूत्रों की मानें तो मंदिर विस्तारीकरण को लेकर मंदिर प्रबंधक कमेटी के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसमें मंदिर प्रबंधन के सुझावों के आधार पर ही काम कराया जाएगा। लखनऊ में मुख्यमंत्री के समक्ष पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन से पूरी कार्ययोजना बताई जाएगी। वहां से सहमति के बाद योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे में संत रविदास मंदिर विस्तारीकरण परियोजना का शिलान्यास कराया जा सकता है। इसकी तैयारियों को लेकर सोमवार को निर्णय लिया जाएगा। विकास प्राधिकरण की ओर से पहले चरण में लंगर हाल और डॉरमेट्री सहित श्रद्धालु सुविधाओं को विकसित किए जाने की योजना है। इसके साथ ही मंदिर विस्तार के लिए 100 एकड़ जमीन अधिग्रहण की योजना है। इसमें यज्ञ शाला, धर्मशाला, पार्किंग, कमरे व हाल बनाने की योजना है। फिलहाल विकास प्राधिकरण पहले चरण में आठ एकड़ जमीन अधिग्रहित करेगा और दो एकड़ जमीन मंदिर प्रबंधन के पास उपलब्ध है। सूत्रों की मानें तो मंदिर विस्तारीकरण को लेकर मंदिर प्रबंधक कमेटी के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसमें मंदिर प्रबंधन के सुझावों के आधार पर ही काम कराया जाएगा। लखनऊ में मुख्यमंत्री के समक्ष पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन से पूरी कार्ययोजना बताई जाएगी। वहां से सहमति के बाद योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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