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मेडिकल कौंसिल और मानवाधिकार तक पहुंचा मामला 0
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के शास्त्री तृतीय वर्ष के छात्र आकाश मिश्रा की ओपीडी में पिटाई करने के मामले में जूनियर डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अधिवक्ताओं की शिकायत पर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) और मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के स्तर से मामले की जांच पहले से जारी है। अब एमसीआई और आयोग के संज्ञान लेने से आरोपी जूनियर डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विश्वविद्यालय में तीन अप्रैल को सर्जरी विभाग की ओपीडी में इलाज कराने गए छात्र आकाश मिश्रा की कहासुनी के बाद जूनियर डॉक्टरों ने पिटाई कर दी थी। आकाश की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। कोर्ट के आदेश पर लंका पुलिस मामले की विवेचना में जुटी है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि दोनों पक्षों के लोगों का बयान दर्ज करने के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट आईएमएस निदेशक को भेजेगी। इसके बाद उसे कुलपति को भेजा जाएगा। इस बीच, अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ ही एमसीआई ने संज्ञान लिया है। जानकारों का मानना है कि मेडिकल काउंसिल और आयोग ने कड़ा फैसला लिया तो आरोपी जूनियर डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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विश्वविद्यालय में तीन अप्रैल को सर्जरी विभाग की ओपीडी में इलाज कराने गए छात्र आकाश मिश्रा की कहासुनी के बाद जूनियर डॉक्टरों ने पिटाई कर दी थी। आकाश की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। कोर्ट के आदेश पर लंका पुलिस मामले की विवेचना में जुटी है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि दोनों पक्षों के लोगों का बयान दर्ज करने के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट आईएमएस निदेशक को भेजेगी। इसके बाद उसे कुलपति को भेजा जाएगा। इस बीच, अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ ही एमसीआई ने संज्ञान लिया है। जानकारों का मानना है कि मेडिकल काउंसिल और आयोग ने कड़ा फैसला लिया तो आरोपी जूनियर डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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