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होली खेलत नंदलाल बिरज में...
Updated Tue, 06 Feb 2018 01:56 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में पूर्व आचार्यों की याद में चार दिवसीय पूर्वाचार्य संगीत समारोह का सोमवार को शुभारंभ हुआ। पहले दिन पद्मविभूषण गिरिजा देवी की स्मृति में स्थानीय कलाकारों के अलावा बाहर से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से सुर, लय, ताल की त्रिवेणी बहाई। इस दौरान होली से लेकर राधाकृष्ण के प्रेम पर आधारित गीत और शहनाई वादन की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने ताली बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। आठ फरवरी तक चलने वाले समारोह में हर दिन आचार्यों की याद में गायन, वादन, नृत्य की प्रस्तुतियां देखने को मिलेगी।
संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में संकाय प्रमुख प्रो. बिरेंद्रनाथ मिश्र और संयोजक डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के निर्देशन में दोपहर एक बजे से शुरू होकर शाम छह बजे तक चले कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए पूरा सभागार दर्शकों से खचाखच भरा रहा। संकाय प्रमुख की ओर से उद्घाटन के बाद डॉ. ज्ञानेश पांडेय ने प्रार्थना ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद जवाहर लाल ने अपनी टीम के साथ राग शुद्ध सारंग की प्रस्तुति की और अंत में धुन मिश्र काफी में ‘होली खेलत नंदलाल बिरज में’ की प्रस्तुति कर माहौल को होलियाना अंदाज में ला दिया। तबले पर राजन कुमार, दुक्कड़ पर मंगल प्रसाद, शहनाई सहयोगी जाकिर हुसैन, मोहन लाल, रमेश प्रसाद रहे। इसके बाद श्रुतिशील उद्धव ने एकल तबला वादन में तीन ताल में बनारस घराने की पारंपरिक बंदिशें, उठान, चलन, बांट, रौ, फ र्द गत और टुकड़ा बजाकर सभी का दिल जीत लिया। हारमोनियम पर मंजय ने उनका साथ दिया। उधर राकेश कुमार की बांसुरी ने सभी को प्रभावित किया। संचालन अनुराधा रतूड़ी ने किया। इस मौके पर प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. संगीता पंडित, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. केए चंचल, प्रो. रेवती साकलकर आदि मौजूद रहे।
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संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में संकाय प्रमुख प्रो. बिरेंद्रनाथ मिश्र और संयोजक डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के निर्देशन में दोपहर एक बजे से शुरू होकर शाम छह बजे तक चले कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए पूरा सभागार दर्शकों से खचाखच भरा रहा। संकाय प्रमुख की ओर से उद्घाटन के बाद डॉ. ज्ञानेश पांडेय ने प्रार्थना ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद जवाहर लाल ने अपनी टीम के साथ राग शुद्ध सारंग की प्रस्तुति की और अंत में धुन मिश्र काफी में ‘होली खेलत नंदलाल बिरज में’ की प्रस्तुति कर माहौल को होलियाना अंदाज में ला दिया। तबले पर राजन कुमार, दुक्कड़ पर मंगल प्रसाद, शहनाई सहयोगी जाकिर हुसैन, मोहन लाल, रमेश प्रसाद रहे। इसके बाद श्रुतिशील उद्धव ने एकल तबला वादन में तीन ताल में बनारस घराने की पारंपरिक बंदिशें, उठान, चलन, बांट, रौ, फ र्द गत और टुकड़ा बजाकर सभी का दिल जीत लिया। हारमोनियम पर मंजय ने उनका साथ दिया। उधर राकेश कुमार की बांसुरी ने सभी को प्रभावित किया। संचालन अनुराधा रतूड़ी ने किया। इस मौके पर प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. संगीता पंडित, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. केए चंचल, प्रो. रेवती साकलकर आदि मौजूद रहे।
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