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वायु प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
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वाराणसी। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में बनारस का 14वें स्थान पर आना किसी झटके से कम नहीं है। ग्रीन पीस और स्विटजरलैंड की कंपनी आईक्यूएअर एअर विजुअल ने यह रैंकिंग जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो एक्यूआई का स्तर चिंताजनक है। फोरलेन के नाम पर खत्म हुई शहर की आधी हरियाली ने कोढ़ में खाज का काम किया है। वहीं भूमिगत बिजली के तार, गैस पाइप लाइन व सीवर के लिए खोदे गए गड्ढों के चलते शहर में इतनी धूल उड़ती है कि सांस लेना मुश्किल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ने खतरे की घंटी बजा दी है यदि अभी भी जिला प्रशासन वायु प्रदूषण को लेकर सख्त नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो जाएगी।
बनारस के खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स ने चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। जिससे सांस रोगियों की समस्या बढ़ती जा रही है। स्मॉग का भी खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। डब्ल्यूएचओ ने फाइन पर्टिकुलर मैटर को ध्यान में रख कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बनारस में वायु प्रदूषण की स्थिति 105.3 माइक्रोग्राम /क्यूबिक मीटर दर्ज की गयी है जो नेशनल सेफ स्टेंडर्ड के अनुसार दो गुना से अधिक है। रिपोर्ट से साफ हो जाता है कि बनारस में वायु प्रदूषण रोकने के लिए कुछ काम नहीं हो रहा है। पेड़ों की कटाई के बाद कागज पर नये पौधे लगा दिए जाते हैं। जो हकीकत में लगते हैं वह जिंदा है या मर गए, इसका पता करने वाला भी कोई नहीं होता है। इसके अतिरिक्त शहर का ट्रैफिक लोड व पुराने वाहनों के धुएं ने स्थिति को और खराब कर दिया है। हवा में नमी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति देखी जाए तो मार्च में कई दिन एक्यूआई इंडेक्स 200 से ऊपर रहा है।
ऐसी स्थिति में बगैर मास्क लगाए घर के बाहर जाना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। हवा की इतनी खराब स्थिति ये दर्शाती है कि प्रदूषण आने वाले समय में आपदा जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में फेफड़े संबंधी बीमारियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
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- प्रो. जीएन श्रीवास्तव, टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग, बीएचयू
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बनारस के खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स ने चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। जिससे सांस रोगियों की समस्या बढ़ती जा रही है। स्मॉग का भी खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। डब्ल्यूएचओ ने फाइन पर्टिकुलर मैटर को ध्यान में रख कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बनारस में वायु प्रदूषण की स्थिति 105.3 माइक्रोग्राम /क्यूबिक मीटर दर्ज की गयी है जो नेशनल सेफ स्टेंडर्ड के अनुसार दो गुना से अधिक है। रिपोर्ट से साफ हो जाता है कि बनारस में वायु प्रदूषण रोकने के लिए कुछ काम नहीं हो रहा है। पेड़ों की कटाई के बाद कागज पर नये पौधे लगा दिए जाते हैं। जो हकीकत में लगते हैं वह जिंदा है या मर गए, इसका पता करने वाला भी कोई नहीं होता है। इसके अतिरिक्त शहर का ट्रैफिक लोड व पुराने वाहनों के धुएं ने स्थिति को और खराब कर दिया है। हवा में नमी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति देखी जाए तो मार्च में कई दिन एक्यूआई इंडेक्स 200 से ऊपर रहा है।
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ऐसी स्थिति में बगैर मास्क लगाए घर के बाहर जाना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। हवा की इतनी खराब स्थिति ये दर्शाती है कि प्रदूषण आने वाले समय में आपदा जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में फेफड़े संबंधी बीमारियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
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- प्रो. जीएन श्रीवास्तव, टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग, बीएचयू