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मेट्रो सर्वे रिपोर्ट न देने पर राइट्स को जारी होगा नोटिस
Updated Sat, 25 Aug 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। तय समय निकल जाने के बाद भी मेट्रो सर्वे रिपोर्ट न देने पर संबंधित संस्था राइट्स को नोटिस जारी किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट 15 अगस्त तक सौंपी जानी थी। इसके बाद वीडीए को इस पर अपना प्रजेंटेशन तैयार करना था। यह प्रजेंटेशन लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन (एलएमआरसी) के समक्ष दिया जाना था, जिसे यह फैसला करना है कि काशी में मेट्रो चल सकती है या नहीं।
शहर में 29 किलोमीटर दायरे में मेट्रो रेल चलाने की योजना है। इसके लिए सर्वे करने वाली संस्था राइट्स को काशी में मेट्रो चलाने के लिए सर्वे करने को कहा गया था। कंपनी ने पहली सर्वे रिपोर्र्ट दी, मगर इसमें खर्च 12256 करोड़ बताया गया था। यह काफी अधिक था। इसके बाद राइट्स को दोबारा सर्वे करने के लिए कहा गया। इसके लिए राइटस को 80 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया। पहले के प्लान के मुताबिक दो रूट पर मेट्रो चलाने का प्रस्ताव है। एक रूट बीएचयू से भेल तक और दूसरा बेनियाबाग से सारनाथ तक है। राइट्स ने पहले रूट के लिए 8418 करोड़ और दूसरे रूट के लिए 3838 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बताई थी।
राइट्स की ओर मेट्रो की जगह मोनो रेल चलाने का प्रजेंटेशन भी दिया गया था। इसके बाद कमिश्नर ने वाटर बेस्ड परिवहन व्यवस्था पर सर्वे करने को कहा था। लेकिन उसके बाद न तो वीडीए को कोई रिपोर्ट आई और न ही लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों के समक्ष प्रजेंटेशन दिया गया है। ऐसे में काफी दिन बीत जाने के बाद अब राइट्स को नोटिस कर जल्द सर्वे रिपोर्ट सौंपने को कहा जाएगा।
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शहर में 29 किलोमीटर दायरे में मेट्रो रेल चलाने की योजना है। इसके लिए सर्वे करने वाली संस्था राइट्स को काशी में मेट्रो चलाने के लिए सर्वे करने को कहा गया था। कंपनी ने पहली सर्वे रिपोर्र्ट दी, मगर इसमें खर्च 12256 करोड़ बताया गया था। यह काफी अधिक था। इसके बाद राइट्स को दोबारा सर्वे करने के लिए कहा गया। इसके लिए राइटस को 80 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया। पहले के प्लान के मुताबिक दो रूट पर मेट्रो चलाने का प्रस्ताव है। एक रूट बीएचयू से भेल तक और दूसरा बेनियाबाग से सारनाथ तक है। राइट्स ने पहले रूट के लिए 8418 करोड़ और दूसरे रूट के लिए 3838 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बताई थी।
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राइट्स की ओर मेट्रो की जगह मोनो रेल चलाने का प्रजेंटेशन भी दिया गया था। इसके बाद कमिश्नर ने वाटर बेस्ड परिवहन व्यवस्था पर सर्वे करने को कहा था। लेकिन उसके बाद न तो वीडीए को कोई रिपोर्ट आई और न ही लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों के समक्ष प्रजेंटेशन दिया गया है। ऐसे में काफी दिन बीत जाने के बाद अब राइट्स को नोटिस कर जल्द सर्वे रिपोर्ट सौंपने को कहा जाएगा।
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