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हरि भटनागर की कहानी में संघर्षों की दास्तां0
Updated Fri, 04 May 2018 01:48 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू हिंदी विभाग में आयोजित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के तहत जाने माने कथाकार एवं ‘रचना समय’ पत्रिका के संपादक हरि भटनागर की कहानियों पर विद्वानों ने चर्चा की। इस दौरान उनकी दो कहानियों ‘सेवड़ी रोटियां और जले आलू’ एवं ‘घोसला’ का पाठ करने के साथ ही इससे जुड़े पहलुओं पर मंथन हुआ।
कहानी पाठ के बाद चर्चा में प्रो. बलिराज पांडेय ने कहा कि भटनागर ने कहानी में निम्नवर्ग के यांत्रिक संघर्ष, भूख और समय के अमानवीय पक्ष को रेखांकित किया है। प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने सेवड़ी रोटियां.. कहानी को ‘कफन’ से आगे की कहानी बताते हुए कहा कि हरि भटनागर परंपरा से विचलन करते हैं और वे फार्मूला राइटिंग के कथाकार नहीं हैं।
प्रो. राजकुमार ने पठित कहानी में स्वाद की विस्मृति पक्ष को रेखांकित किया। प्रो. आशीष त्रिपाठी ने हरि भटनागर की कहानियों का संबंध कहानी परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि हरि भटनागर ने निम्नवर्ग के जीवन पर प्रतिबद्धता से लगातार लिखा है। समारोह में डॉ. नीरज खरे, डॉ. प्रभाकर सिंह, आसिम अंसारी आदि मौजूद रहे।
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कहानी पाठ के बाद चर्चा में प्रो. बलिराज पांडेय ने कहा कि भटनागर ने कहानी में निम्नवर्ग के यांत्रिक संघर्ष, भूख और समय के अमानवीय पक्ष को रेखांकित किया है। प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने सेवड़ी रोटियां.. कहानी को ‘कफन’ से आगे की कहानी बताते हुए कहा कि हरि भटनागर परंपरा से विचलन करते हैं और वे फार्मूला राइटिंग के कथाकार नहीं हैं।
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प्रो. राजकुमार ने पठित कहानी में स्वाद की विस्मृति पक्ष को रेखांकित किया। प्रो. आशीष त्रिपाठी ने हरि भटनागर की कहानियों का संबंध कहानी परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि हरि भटनागर ने निम्नवर्ग के जीवन पर प्रतिबद्धता से लगातार लिखा है। समारोह में डॉ. नीरज खरे, डॉ. प्रभाकर सिंह, आसिम अंसारी आदि मौजूद रहे।
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