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20 दिन में 30 लाख की संपति राख
Updated Wed, 25 Apr 2018 12:52 AM IST
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ज्ञानपुर। गर्मी शुरू होते ही जिले में बढ़ीं अगलगी की घटनाओं से भारी क्षति पहुंची है। जिले में पिछले 20 दिन में करीब तीस लाख रुपये की संपत्ति जाग में जलकर राख हो चुकी है। इनमें ज्यादातर घटनाएं बिजली विभाग की लापरवाही अर्थात शार्ट सर्किट से हुई हैं। गृहस्थी और फसलें जलने से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। ग्रामीण इलाकों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे पर नाकाम रही है। जहां दस्ता पहुंचा भी तो इतनी देरी से कि सारी फसलें राख होने के बाद। हालांकि अग्निशमन विभाग 50 लाख की संपत्ति बचाने का दावा कर रहा है।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही आसमान से आग बरसाती सूरज की किरणों के बीच कहीं से निकलने वाली हल्की सी चिंगारी भी शोला बन जाती है। लिहाजा अगलगी की घटनाओं में बाढ़ आ जाती है तो बचाव के लिए सभी की अपेक्षाएं टिक जाती है दमकल विभाग पर, लेकिन महकमा अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है। कारण यह है कि भले ही महकमे के पास अगलगी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए संसाधन चकाचक है, लेकिन कर्मियों की कमी आड़े आ रही है। जिले की कुल 17 लाख आबादी के बीच होने वाली किसी भी अगलगी की घटना की रोकथाम की जिम्मेदारी महज 29 फायर ब्रिगेड कर्मचारियों पर है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एक से 20 अप्रैल तक जिले में 60 अगलगी की घटनाएं हुईं। इसमें तकरीबन 30 लाख की संपत्ति नष्ट हुई और 50 लाख की संपत्ति बचाई गई, लेकिन बड़ी संख्या में अगलगी की घटनाएं अग्निशमन विभाग के पास नहीं पहुंच सकीं। इससे नुकसान का आंकड़ा अधिक हो जाता है। कई मामलों में अग्निशमन का दस्ता भी समय पर नहीं पहुंच पाता। पहुंचता भी है तो आग बुझने के बाद। अग्निशमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोज ने कहा कि गेहूं की फसल चंद समय में ही नष्ट हो जाती है। इससे अग्निशमन दस्ता चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता। मकान आदि में आग लगने पर टीम पहुंचकर काम करती है।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही आसमान से आग बरसाती सूरज की किरणों के बीच कहीं से निकलने वाली हल्की सी चिंगारी भी शोला बन जाती है। लिहाजा अगलगी की घटनाओं में बाढ़ आ जाती है तो बचाव के लिए सभी की अपेक्षाएं टिक जाती है दमकल विभाग पर, लेकिन महकमा अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है। कारण यह है कि भले ही महकमे के पास अगलगी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए संसाधन चकाचक है, लेकिन कर्मियों की कमी आड़े आ रही है। जिले की कुल 17 लाख आबादी के बीच होने वाली किसी भी अगलगी की घटना की रोकथाम की जिम्मेदारी महज 29 फायर ब्रिगेड कर्मचारियों पर है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एक से 20 अप्रैल तक जिले में 60 अगलगी की घटनाएं हुईं। इसमें तकरीबन 30 लाख की संपत्ति नष्ट हुई और 50 लाख की संपत्ति बचाई गई, लेकिन बड़ी संख्या में अगलगी की घटनाएं अग्निशमन विभाग के पास नहीं पहुंच सकीं। इससे नुकसान का आंकड़ा अधिक हो जाता है। कई मामलों में अग्निशमन का दस्ता भी समय पर नहीं पहुंच पाता। पहुंचता भी है तो आग बुझने के बाद। अग्निशमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोज ने कहा कि गेहूं की फसल चंद समय में ही नष्ट हो जाती है। इससे अग्निशमन दस्ता चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता। मकान आदि में आग लगने पर टीम पहुंचकर काम करती है।
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