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वीआरएस ले रहे चिकित्सक, कैसे होगा इलाज
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:36 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले में जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में तैनात सरकारी चिकित्सकों का मोह नौकरी से भंग हो रहा है। तकरीबन आधा दर्जन चिकित्सक वीआरएस लेने की कतार में खड़े हो गए हैं। दो चिकित्सकों ने तो आवेदन भी कर दिया है। इसके पीछे चिकित्सकों ने अपने निजी कारण बताए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि तनख्वाह से असंतुष्ट डाक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस न करने देने का दबाव रास नहीं आ रहा है।
सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर शासन के सख्ती बरतने के बाद से अचानक सरकारी डाक्टरों के वीआरएस के लिए आवेदन करने का सिलसिला बढ़ गया है। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के दो डाक्टरों सर्जन अब्दुल वाहिद और बाल रोग विशेषज्ञ अनुराग श्रीवास्तव समेत अन्य कई सरकारी चिकित्सकों ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है। इन दोनों चिकित्सकों ने वीआरएस लेने के पीछे निजी समस्या बताया है। इसके बाद से वीआरएस लेने में चिकित्सकों की रुचि बढ़ गई है। महकमे में चर्चा है कि और चार-पांच चिकित्सक वीआरएस लेने का मन बना चुके हैं। हालांकि उनका नाम अभी सामने नहीं आया है। यों तो चिकित्सक वीआरएस लेने के पीछे अपनी निजी समस्याएं बता रहे हैं, लेकिन इसकी वजहें और भी मानी जा रही हैं। मेडिकल से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी डाक्टरों के वीआरएस लेने के पीछे की वजह है सरकार के प्राइवेट प्रैक्टिस पर कड़ाई करना। इसके कारण वह वीआरएस का रास्ता अपना रहे हैं। जिला चिकित्सालय के सर्जन अब्दुल वाहिद और बाल रोग विशेषज्ञ अनुराग श्रीवास्तव के वीआरएस लेने से पहले से ही चिकित्सकों के अभाव से जूझ रहे जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ना तय है।
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सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर शासन के सख्ती बरतने के बाद से अचानक सरकारी डाक्टरों के वीआरएस के लिए आवेदन करने का सिलसिला बढ़ गया है। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के दो डाक्टरों सर्जन अब्दुल वाहिद और बाल रोग विशेषज्ञ अनुराग श्रीवास्तव समेत अन्य कई सरकारी चिकित्सकों ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है। इन दोनों चिकित्सकों ने वीआरएस लेने के पीछे निजी समस्या बताया है। इसके बाद से वीआरएस लेने में चिकित्सकों की रुचि बढ़ गई है। महकमे में चर्चा है कि और चार-पांच चिकित्सक वीआरएस लेने का मन बना चुके हैं। हालांकि उनका नाम अभी सामने नहीं आया है। यों तो चिकित्सक वीआरएस लेने के पीछे अपनी निजी समस्याएं बता रहे हैं, लेकिन इसकी वजहें और भी मानी जा रही हैं। मेडिकल से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी डाक्टरों के वीआरएस लेने के पीछे की वजह है सरकार के प्राइवेट प्रैक्टिस पर कड़ाई करना। इसके कारण वह वीआरएस का रास्ता अपना रहे हैं। जिला चिकित्सालय के सर्जन अब्दुल वाहिद और बाल रोग विशेषज्ञ अनुराग श्रीवास्तव के वीआरएस लेने से पहले से ही चिकित्सकों के अभाव से जूझ रहे जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ना तय है।
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