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नृत्य, गायन और वादन की बही त्रिवेणी
Updated Tue, 13 Feb 2018 03:16 AM IST
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वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में सोमवार को तीन दिवसीय 27 वें शिवरात्रि संगीत महोत्सव का सोमवार को
भव्य आगाज हुआ। प्रख्यात संत रमेशभाई ओझा के पावन सानिध्य में शुरू हुए इस महोत्सव को देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने
अविस्मरणीय बना दिया। ख्यातिलब्ध कलाकारों की प्रस्तुति से नृत्य, गायन और वादन की त्रिवेणी बही। महोत्सव की पहली प्रस्तुति विख्यात कलाकार पद्मश्री गीता चन्द्रन के भरतनाट्य की मनमोहिनी नृत्य की रही।
उन्होंने सबसे पहले कर्नाटक शैली में मल्लारी की प्रस्तुति दी। देवाधिदेव महादेव को समर्पित यह प्रस्तुति राग नाटई ताल अड़ में रही। दूसरी प्रस्तुति शिवस्तुति रही, जो कि राग हंसध्वनि और आदि ताल में निबद्ध रही। उसके बाद वर्णम राग बिहाग, आदि ताल में कृष्ण के विभिन्न मनोहारी लीलाओं और स्वरूपों का वर्णन रहा। चैथी प्रस्तुति देवी स्तुति रही, जो कि रेवती राग और आदि ताल में निबद्ध रही। अंतिम प्रस्तुति वनमाली मंगलम की रही। उनके साथ संगत नृत्य पर अंजना शेसाद्री, अमृतारुति राधाकृष्णनन राधिका, आकांक्षा कुमार, गोपालन और लाइट पर संदीप दत्ता रहे। महोत्सव में दूसरी प्रस्तुति उपशास्त्रीय गायक भगीरथ जालान की रही। जिन्होंने कार्यक्रम में भजनों की गंगा प्रवाहित की। उन्होंने सबसे पहले राग झंझौटी में जय हनुमान प्रस्तुत किया उसके बाद राग भोपाली में जागिए गिरजापति काशी प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर ललित कुमार, हारमोनियम पर अमन जैन और बांसुरी पर राकेश ने संगत की। महोत्सव की तीसरी प्रस्तुति युवा बांसुरी वादक सुशान्त सिंह की रही। उन्होंने सबसे पहले राग जोग, झप ताल में निबद्ध एक बंदिश सुनाई। उनके साथ तबले पर पं पुंडलीक कृष्ण भागवत ने संगत की। इसके पूर्व महोत्सव का शुभारंभ संत रमेश भाई ओझा, भाई श्रीस्वामी अनुभवानन्द महाराज और किशन जालान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों ने भगवान नटराज की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर महोत्सव की औपचारिक शुरूआत की। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।
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भव्य आगाज हुआ। प्रख्यात संत रमेशभाई ओझा के पावन सानिध्य में शुरू हुए इस महोत्सव को देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने
अविस्मरणीय बना दिया। ख्यातिलब्ध कलाकारों की प्रस्तुति से नृत्य, गायन और वादन की त्रिवेणी बही। महोत्सव की पहली प्रस्तुति विख्यात कलाकार पद्मश्री गीता चन्द्रन के भरतनाट्य की मनमोहिनी नृत्य की रही।
उन्होंने सबसे पहले कर्नाटक शैली में मल्लारी की प्रस्तुति दी। देवाधिदेव महादेव को समर्पित यह प्रस्तुति राग नाटई ताल अड़ में रही। दूसरी प्रस्तुति शिवस्तुति रही, जो कि राग हंसध्वनि और आदि ताल में निबद्ध रही। उसके बाद वर्णम राग बिहाग, आदि ताल में कृष्ण के विभिन्न मनोहारी लीलाओं और स्वरूपों का वर्णन रहा। चैथी प्रस्तुति देवी स्तुति रही, जो कि रेवती राग और आदि ताल में निबद्ध रही। अंतिम प्रस्तुति वनमाली मंगलम की रही। उनके साथ संगत नृत्य पर अंजना शेसाद्री, अमृतारुति राधाकृष्णनन राधिका, आकांक्षा कुमार, गोपालन और लाइट पर संदीप दत्ता रहे। महोत्सव में दूसरी प्रस्तुति उपशास्त्रीय गायक भगीरथ जालान की रही। जिन्होंने कार्यक्रम में भजनों की गंगा प्रवाहित की। उन्होंने सबसे पहले राग झंझौटी में जय हनुमान प्रस्तुत किया उसके बाद राग भोपाली में जागिए गिरजापति काशी प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर ललित कुमार, हारमोनियम पर अमन जैन और बांसुरी पर राकेश ने संगत की। महोत्सव की तीसरी प्रस्तुति युवा बांसुरी वादक सुशान्त सिंह की रही। उन्होंने सबसे पहले राग जोग, झप ताल में निबद्ध एक बंदिश सुनाई। उनके साथ तबले पर पं पुंडलीक कृष्ण भागवत ने संगत की। इसके पूर्व महोत्सव का शुभारंभ संत रमेश भाई ओझा, भाई श्रीस्वामी अनुभवानन्द महाराज और किशन जालान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों ने भगवान नटराज की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर महोत्सव की औपचारिक शुरूआत की। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।
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