{"_id":"5d07fa648ebc3e5096325531","slug":"15608039271-varanasi-news102","type":"story","status":"publish","title_hn":"सद्गुरु कबीर को मात्र समाज सुधारक समझना अज्ञानता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सद्गुरु कबीर को मात्र समाज सुधारक समझना अज्ञानता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौबेपुर। सद्गुरु कबीर को मात्र समाज सुधारक समझना अज्ञानता है। उनकी वाणियों के व्यापक प्रचार की आवश्यकता है। यह बातें विहंगम योग के संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहा में आयोजित सद्गुरु कबीर प्राकट्य दिवस समारोह के अवसर पर कहीं।
आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज ने कहा कि हम उसी परंपरा के पथिक हैं, जिसमें अध्यात्म का सार छिपा है। जिसमें जीवन का यथार्थ छिपा है, जिसमें जीवन के मंत्र हमें प्राप्त होते हैं। कबीर ने सत्य को उजागर किया है।
उन्होंने साहब कबीर और विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु सदाफल देव जी में समानता बताया। कहा कि अपने भाव, संकल्पों को प्रकट करने का अनूठा अंदाज जो साहब की वाणियों में है, वही सदाफल देव जी के ‘स्वर्वेद’ के स्वरों से भी है। इस दौरान साहब की शब्द, साखी, रमैनी का संगीतमय गायन से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं साधना विहंगम योग के ध्यान को भी जानकर आत्मिक कल्याण के मार्ग को प्रशस्त किए।
विज्ञापन
प्रात: 5 बजे से 7 बजे तक योग प्रशिक्षकों द्वारा शारीरिक आरोग्यता के लिए आसन-प्राणायाम एवं ध्यान प्रशिक्षण साधकों को दिया गया। दिन में 11 बजे से वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ स्वतंत्र देव जी महाराज एवं विज्ञानदेव जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। इस मौके पर उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विदेश से हजारों भक्त पहुंचकर संत प्रवर एवं सद्गुरु देव का आशीर्वाद प्राप्त किए।
विज्ञापन
आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज ने कहा कि हम उसी परंपरा के पथिक हैं, जिसमें अध्यात्म का सार छिपा है। जिसमें जीवन का यथार्थ छिपा है, जिसमें जीवन के मंत्र हमें प्राप्त होते हैं। कबीर ने सत्य को उजागर किया है।
विज्ञापन
उन्होंने साहब कबीर और विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु सदाफल देव जी में समानता बताया। कहा कि अपने भाव, संकल्पों को प्रकट करने का अनूठा अंदाज जो साहब की वाणियों में है, वही सदाफल देव जी के ‘स्वर्वेद’ के स्वरों से भी है। इस दौरान साहब की शब्द, साखी, रमैनी का संगीतमय गायन से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं साधना विहंगम योग के ध्यान को भी जानकर आत्मिक कल्याण के मार्ग को प्रशस्त किए।
विज्ञापन
प्रात: 5 बजे से 7 बजे तक योग प्रशिक्षकों द्वारा शारीरिक आरोग्यता के लिए आसन-प्राणायाम एवं ध्यान प्रशिक्षण साधकों को दिया गया। दिन में 11 बजे से वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ स्वतंत्र देव जी महाराज एवं विज्ञानदेव जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। इस मौके पर उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विदेश से हजारों भक्त पहुंचकर संत प्रवर एवं सद्गुरु देव का आशीर्वाद प्राप्त किए।