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आग से दो झोपड़ियां जली, बालिका की मौत
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हनुमानगंज। अपनी मौसी की शादी में ननिहाल आई श्वेता यदि पिता की बात मानकर घर चली गई होती तो शायद आज वह हंसती-खेलती जीवित होती। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था जिसने श्वेता को उसके मां-बाप से हमेशा के लिए छीन लिया। श्वेता अपने नाना-नानी की भी दुलारी थी और जब भी ननिहाल आती थी तो कई दिनों तक यहां रहती थी।
15 जून को श्वेता की मौसी सुमन की शादी थी। लिहाजा वह एक सप्ताह से यहीं पर रह रही थी। शनिवार को शादी का कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न हुआ और मौसी की विदाई भी हो गई। रविवार की सुबह पिता मनोज उसे अपने साथ अपने गांव नगरा थाना क्षेत्र खलसापुर लेकर जाना चाह रहे थे। उन्होंने उससे कई बार घर चलने के लिए कहा पर श्वेता नानी के पास कुछ और दिन रुकने की जिद्द पकड़े रही। इस पर वे उसे छोड़ कर चले गए और श्वेता नाना-नानी के पास ही रुक गई। शाम को बेटी की मौत की सूचना मिलते ही मनोज दहाड़े मारकर रो पड़े, वे बार-बार यही कह रहे थे कि यदि श्वेता उनकी बात मानकर चली आई होती तो आज यह घटना नहीं होती। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी श्वेता हर काम में मां का हाथ बंटाती थी। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों की आंखें डबडबा जा रही थीं। श्वेता से उसकी छोटी बहन रीमा व छोटा भाई छोटू का रोते-रोते बुरा हाल था।
रिश्तेदारों के भी कैश, गहने और कीमती सामान जले : हनुमानगंज। जयकृष्ण की बेटी सुमन की शादी शनिवार को हुई। दूसरे दिन रविवार को रिश्तेदार अभी घर पर ही थे। शाम को घर में हंसी खुशी का माहौल था। शाम सात बजे भोजन बनाते समय चूल्हे की चिंगारी से जयकृष्ण यादव की झोपड़ी में आग लग गई। शादी के लिए लाए गए तीन सिलिंडर उसी झोपड़ी में रखे थे उन्हें आग की जद में आते देख महिलाएं और लड़कियां भाग कर पड़ोस में जयकृष्ण के भाई लालकृष्ण यादव की झोपड़ी में चली गईं। इतने में ही एक सिलेंडर फट गया जिससे लालकृष्ण की झोपड़ी जलने लगी। वहां मौजूद महिलाएं और लड़कियां तो बच कर निकल गई पर श्वेता नहीं निकल पाई। सभी रिश्तेदार शादी में आए थे इसकी वजह से गहने और नकदी सबके पास थी। आग में रिश्तेदारों के गहने, नकदी और कीमती सामान भी जलकर नष्ट हो गए।
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15 जून को श्वेता की मौसी सुमन की शादी थी। लिहाजा वह एक सप्ताह से यहीं पर रह रही थी। शनिवार को शादी का कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न हुआ और मौसी की विदाई भी हो गई। रविवार की सुबह पिता मनोज उसे अपने साथ अपने गांव नगरा थाना क्षेत्र खलसापुर लेकर जाना चाह रहे थे। उन्होंने उससे कई बार घर चलने के लिए कहा पर श्वेता नानी के पास कुछ और दिन रुकने की जिद्द पकड़े रही। इस पर वे उसे छोड़ कर चले गए और श्वेता नाना-नानी के पास ही रुक गई। शाम को बेटी की मौत की सूचना मिलते ही मनोज दहाड़े मारकर रो पड़े, वे बार-बार यही कह रहे थे कि यदि श्वेता उनकी बात मानकर चली आई होती तो आज यह घटना नहीं होती। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी श्वेता हर काम में मां का हाथ बंटाती थी। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों की आंखें डबडबा जा रही थीं। श्वेता से उसकी छोटी बहन रीमा व छोटा भाई छोटू का रोते-रोते बुरा हाल था।
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रिश्तेदारों के भी कैश, गहने और कीमती सामान जले : हनुमानगंज। जयकृष्ण की बेटी सुमन की शादी शनिवार को हुई। दूसरे दिन रविवार को रिश्तेदार अभी घर पर ही थे। शाम को घर में हंसी खुशी का माहौल था। शाम सात बजे भोजन बनाते समय चूल्हे की चिंगारी से जयकृष्ण यादव की झोपड़ी में आग लग गई। शादी के लिए लाए गए तीन सिलिंडर उसी झोपड़ी में रखे थे उन्हें आग की जद में आते देख महिलाएं और लड़कियां भाग कर पड़ोस में जयकृष्ण के भाई लालकृष्ण यादव की झोपड़ी में चली गईं। इतने में ही एक सिलेंडर फट गया जिससे लालकृष्ण की झोपड़ी जलने लगी। वहां मौजूद महिलाएं और लड़कियां तो बच कर निकल गई पर श्वेता नहीं निकल पाई। सभी रिश्तेदार शादी में आए थे इसकी वजह से गहने और नकदी सबके पास थी। आग में रिश्तेदारों के गहने, नकदी और कीमती सामान भी जलकर नष्ट हो गए।
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