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समय से नहीं खुलता जन औषधि केंद्र, मरीज परेशान
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वाराणसी। मरीजों को सस्ती दवाइयां अस्पताल परिसर में ही मिल सकें, इसलिए जन औषधि केंद्र खुलवा तो दिए गए लेकिन ये समय से नहीं खुल रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर दवा लिखते हैं तो वह अस्पताल के दवा काउंटर पर नहीं मिल पाती है। मजबूरी में मरीजों का बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। रामनगर के लाल बहादुर शास्त्री जिला अस्पताल का इन दिनों यही हाल है। यहां इमरजेंसी कक्ष के सामने चलने वाले जन औषधि केंद्र के खुलने का मरीजों को इंतजार करना पड़ता है।
रामनगर अस्पताल की बात करें तो जन औषधि केंद्र कभी भी 10 बजे के पहले नहीं खुलता है। मंगलवार को केंद्र के बाहर मरीज बैठे थे कि जैसे ही खुले और दवा लेक घर जाएं। सोमवार को भी 10 बजे के बाद ही केंद्र जैसे ही खुला, भीड़ लग गयी। ऐसे में लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का सरकार का दावा भी सही नहीं साबित हो रहा है।
जन औषधि केंद्रों पर नियमानुसार तो 650 दवाएं होनी चाहिए, लेकिन जिले के अस्पतालों में चलने वाले अधिकांश केंद्रों में कही भी पूरी दवाएं नहीं रहती हैं। कहीं 150 से 200 तो कहीं 300 दवाइयां रहती हैं।
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बोले मरीज - केंद्र का क्या मतलब जब खुले ही नहीं
अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की माने तो एक तो केंद्र समय से नहीं खुलता दूसरे डॉक्टर भी अधिकांश दवाएं ऐसी लिखते हैं, जो अस्पताल के अंदर नहीं मिल पाती हैं। सुबह 10 बजे जन औषधि केंद्र के सामने रामधनी ने बताया कि अगर समय से दुकान खुल जाता तो दवा यहीं से मिल जाती। महेवा निवासी उर्मिला हाथ में पर्चा लेकर खड़ी थी बताया कि दुकान 10 बजे से पहले कभी नहीं खुलती। सीहाबीर की संजू देवी ने बताया कि जन औषधि केंद्र समय से खुले तब तो दवाइंया मिलें।
जन औषधि केंद्र को सुबह 8 बजे तय समय पर खुलवाया जाएगा। इसके लिए संबंधित एजेंसी के लोगों से बातचीत की जाएगी, जिससे कि मरीजों को इसका लाभ मिले।-डॉ. कमल कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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रामनगर अस्पताल की बात करें तो जन औषधि केंद्र कभी भी 10 बजे के पहले नहीं खुलता है। मंगलवार को केंद्र के बाहर मरीज बैठे थे कि जैसे ही खुले और दवा लेक घर जाएं। सोमवार को भी 10 बजे के बाद ही केंद्र जैसे ही खुला, भीड़ लग गयी। ऐसे में लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का सरकार का दावा भी सही नहीं साबित हो रहा है।
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जन औषधि केंद्रों पर नियमानुसार तो 650 दवाएं होनी चाहिए, लेकिन जिले के अस्पतालों में चलने वाले अधिकांश केंद्रों में कही भी पूरी दवाएं नहीं रहती हैं। कहीं 150 से 200 तो कहीं 300 दवाइयां रहती हैं।
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बोले मरीज - केंद्र का क्या मतलब जब खुले ही नहीं
अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की माने तो एक तो केंद्र समय से नहीं खुलता दूसरे डॉक्टर भी अधिकांश दवाएं ऐसी लिखते हैं, जो अस्पताल के अंदर नहीं मिल पाती हैं। सुबह 10 बजे जन औषधि केंद्र के सामने रामधनी ने बताया कि अगर समय से दुकान खुल जाता तो दवा यहीं से मिल जाती। महेवा निवासी उर्मिला हाथ में पर्चा लेकर खड़ी थी बताया कि दुकान 10 बजे से पहले कभी नहीं खुलती। सीहाबीर की संजू देवी ने बताया कि जन औषधि केंद्र समय से खुले तब तो दवाइंया मिलें।
जन औषधि केंद्र को सुबह 8 बजे तय समय पर खुलवाया जाएगा। इसके लिए संबंधित एजेंसी के लोगों से बातचीत की जाएगी, जिससे कि मरीजों को इसका लाभ मिले।-डॉ. कमल कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक