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शिक्षा व संस्कार ही जीवन में सरसता घोलती है : आराधना देवी

Mon, 27 May 2019 02:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2019 02:03 AM IST
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शिक्षा व संस्कार ही जीवन में सरसता घोलती है : आराधना देवी
हरहुआ। रसूलपुर रामेश्वर में चल रहे संगीतमय श्री राम कथा में बाल व्यास आराधना देवी ने कहा की युवा पीढ़ी अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूल रही है। ऐसे समय में युवाओं को शिक्षा के साथ संस्कार ज्ञान देना होगा। हम अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार दोनों की ज्ञान दें । जब बात राष्ट्र की हो, धर्म की हो, भारतीय संस्कृति की हो तब भारत का साधू अपनी ज्ञान की झोली फैलाने में संकोच नहीं करता ।
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बाल ब्यास शशिकांत जी महाराज ने कहा कि दस हजार राजा मिलकर भी एक धनुष को नहीं उठा पाए क्यों की दस हजार राजा इक बार में उठा रहे थे एक होकर नहीं। समाज का कोई बड़ा कार्य तब तक नहीं हो सकता जब तक समाज में सब लोग मिलकर एक न हों।
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समाज का बड़ा से बड़ा काम वह व्यक्ति कर सकता है। जिसके जीवन में सरलता, सहजता और विनम्रता हो। यह हमारे शिक्षा व संस्कार का मूलमंत्र है। कथा में अयोध्या नगरी में आरती का भव्य नजारा दिखा। संकट मोचन रामलीला समिति की ओर से गौतम सिंह ,अवधेश मिश्र, रूपेश कुमार पांडेय, अरुण तिवारी ने आरती उतारी और अतिथियों का अंगवस्त्र भेंटकर प्रसाद वितरित किया गया।
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