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डीरेका में फहरने लगा 100 फीट ऊंचा तिरंगा
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वाराणसी। डीरेका में शुक्रवार से 100 फीट ऊंचा राष्ट्र ध्वज फहरने लगा। रेलवे बोर्ड के निर्देश के क्रम में डीजल रेल इंजन कारखाना स्थित प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र के प्रांगण में स्मरणार्थ राष्ट्रीय ध्वज (मानुमेंटल नेशनल फ्लैग) की स्थापना की गई। महाप्रबंधक रश्मि गोयल ने सुबह इस झंडे का बटन दबाकर आरोहण किया। बाद में रेलवे सुरक्षा बल ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी तथा राष्ट्र धुन बजाया।
इसके पूर्व रेलवे सुरक्षा बल ने महाप्रबंधक को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर उप महाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा, पीसीईई एके सिंघल, पीएफए जय नारायण पांडेय, प्राचार्य प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र रामजन्म चौबे सहित बड़ी संख्या में विभागाध्यक्ष, अधिकारी, पर्यवेक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर देश में 75 ‘ए’ क्लास स्टेशनों तथा उत्पादन इकाइयों में 100 फ ीट ऊंचा स्मरणार्थ राष्ट्रीय ध्वज लगाया जा रहा है। रेशमी कपड़े से बने इस ध्वज का आकार 20 फ ीट लंबा और 30 फीट चौड़ा है तथा इसका वजन आठ किलोग्राम है। इस ध्वज को 50 मीटर प्रति सेकेंड वायुवेग को सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी डिजाइन लाइफ को लेकर 25 साल का दावा किया गया है।
संवैधानिक तथ्य के अनुसार सूर्य डूबने के पश्चात राष्ट्रीय ध्वज को उतारना आवश्यक होता है। हालांकि यदि रात में उसे रोशनी से प्रकाशमय किया गया हो तो ध्वज को उतारने की आवश्यकता नहीं होती। वर्तमान में इस ध्वज को प्रकाशमय करने के लिए डीरेका में 350 वाट की चार लाइट लगाई गई है।
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इसके पूर्व रेलवे सुरक्षा बल ने महाप्रबंधक को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर उप महाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा, पीसीईई एके सिंघल, पीएफए जय नारायण पांडेय, प्राचार्य प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र रामजन्म चौबे सहित बड़ी संख्या में विभागाध्यक्ष, अधिकारी, पर्यवेक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर देश में 75 ‘ए’ क्लास स्टेशनों तथा उत्पादन इकाइयों में 100 फ ीट ऊंचा स्मरणार्थ राष्ट्रीय ध्वज लगाया जा रहा है। रेशमी कपड़े से बने इस ध्वज का आकार 20 फ ीट लंबा और 30 फीट चौड़ा है तथा इसका वजन आठ किलोग्राम है। इस ध्वज को 50 मीटर प्रति सेकेंड वायुवेग को सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी डिजाइन लाइफ को लेकर 25 साल का दावा किया गया है।
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संवैधानिक तथ्य के अनुसार सूर्य डूबने के पश्चात राष्ट्रीय ध्वज को उतारना आवश्यक होता है। हालांकि यदि रात में उसे रोशनी से प्रकाशमय किया गया हो तो ध्वज को उतारने की आवश्यकता नहीं होती। वर्तमान में इस ध्वज को प्रकाशमय करने के लिए डीरेका में 350 वाट की चार लाइट लगाई गई है।
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