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कड़ी धूप में इबादतगाहों में पहुंचे लोग, मांगी खुदा की रहमत

Sat, 11 May 2019 02:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2019 02:03 AM IST
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कड़ी धूप में इबादतगाहों में पहुंचे लोग, मांगी खुदा की रहमत
वाराणसी। जानबूझकर रोजा नहीं रखने वाले, हट्टे-कट्टे सेहतमंद लोग रब के गुनाहगार हैं। नबी-ए-करीम का कहना है कि जो लोग रमजान की फजीलत को जान जाते हैं उनकी ख्वाहिश होती है कि पूरे साल रमजान रहे। यह तकरीर शुक्रवार को शहर की मस्जिदों में मुकद्दस रमजान के पहले जुमे को हुई। कड़ी धूप में इबादतगाहों में पहुंचे लोगों ने खुदा की रहमत के लिए दुआएं मांगी।
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अलसुबह रोजेदारों ने सहरी कर रोजा शुरू किया। कुछ आराम करने के बाद जुमा की नमाज की तैयारी में लग गए। इस मौके पर इबादतगाहों और घरों में साफ.सफ ाई की गई। लोगों ने गुस्ल कर साफ.-सुथरे कपड़े पहने। अजान होने से पहले मस्जिदों का रुख किया, ताकि पहली कतार में जगह मिल जाए। अजान शुरू होने तक मस्जिदें नमाजियों से भर गईं। नमाज के बाद इमाम ने तकरीर पेश की। पहले जुमा की नमाज शहर की छोटी-बड़ी करीब सवा दौ सौ मस्जिदों में कौम-ओ-मिल्लत और मुल्क में अमन-ओ-अमान की दुआओं के साथ पूरी हुई।
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नमाज अदा करने के बाद बड़ी तादाद में लोगों ने फल, खजूर, मिठाई आदि चीजों की खरीदारी की। मस्जिद रंग ढलवा नई सड़क में मौलाना जाहिद ने नमाज अदा कराई। नमाज से पहले उन्होंने तकरीर में कहा कि रोजा रखकर मोमिनीन झूठ से परहेज करें, नमाज की पाबंदी करें और सहरी जरूर खाएं। उन्होंने कहा कि रोजा बेशक बुराइयों से हमें बचाता है, सही रास्ते पर ले जाता है। रोजेदार को चाहिए कि वो सहरी में भले ही एक घूंट पानी पीए या एक खजूर ही खाए मगर सहरी जरूर करें। उन्होंने कहा कि नमाज एक फ र्ज है और रोजा अलग फ र्ज है। इसलिए रोजा रखें तो नमाज भी अदा करें।
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ऐसे ही मस्जिद अहनाफ में मौलाना मो. फैजानुल्लाह कादरी, शाही मस्जिद बादशाहबाग में मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में मौलाना शमशुद्दीन, मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी में मौलाना मुजीब आलम, मस्जिद लाट सरैया में मौलाना जियाउर्रहमान, मस्जिद लाटशाही में हाफि ज हबीबुर्रहमान, मस्जिद लंगड़े हाफि ज में मौलाना जकीउल्लाह असदुल कादरी, बड़ी मस्जिद सदर बाजार में मौलाना मेराज, जामा मस्जिद नदेसर में मौलाना मजहरुल हक ने नमाज अदा कराई। ऐसे ही मस्जिद उल्फ त बीबी अर्दली बाजार, मस्जिद ज्ञानवापी, काली मस्जिद छित्तनपुरा, मस्जिद दायम खां, मस्जिद अस्तबल, मस्जिद कुश्ताबेगम, मस्जिद काश्मीरीगंज, मस्जिद नगीना, मस्जिद कमच्छा, मस्जिद गौसिया, मस्जिद विनायका, मस्जिद रजा, मस्जिद हबीबिया समेत तमाम मस्जिदों में नमाजियों का मजमा जुटा और लोगों ने नमाज अदा करके बुजुर्गों की दर पर फ ातेहा पढ़ी।
घरों में महिलाओं ने जानमाजा बिछाया। नमाज अदा कर कुरान-ए-पाक की तिलावत की। पुरुषों ने भी घर आकर तिलावत और तस्बीह की। इसके बाद इफ्तार की तैयारी शुरू हो गई। लजीज व्यंजन बनने शुरू हुए। पकौड़ियां, चिप्स, पापड़, शर्बत, समोसे, फ्रूट चाट से दस्तरख्वान सजाए गए। शाम को असर की नमाज पढ़ी गई। इसके बाद इफ्तारी मुकम्मल हो जाने पर मस्जिदों व पासपड़ोस के घरों में भेजी गई।

शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैय्यद फरमान हैदर करबलाई ने बताया कि मस्जिदों में जुमे की नमाज के बाद मौलाना जफर हुसैनी, मौलाना हैदर अब्बास, मौलाना जहीन हैदर, मौलाना बदरुल हसन, मौलाना हैदर मेंहदी ने मजलिसों को खिताब किया। उन्होंने रमजान की फजीलतों को बयान किया और कर्बला के वाकयात पढ़े। इफ्तार के बाद मजलिसों का आयोजन हुआ। 11 मई को रमजान की नमाज नई सड़क स्थित मस्जिद सादे खां में आयोजित होगी।
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