वाराणसी। हिंदी केवल भाषा नहीं है बल्कि यह भारत की आत्मा है। हिंदी वो है जो भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हमें दिया। दुनिया भारत की हो इसके लिए आवश्यक है कि हिंदी भाषा समृद्ध हो। उक्त विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला ने व्यक्त किए। वह बुधवार को हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम कलरव एवं साहित्योत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य के नवजागरण की भाषा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि साहित्य हमें परिस्थिति और स्वयं के आत्मावलोकन का दर्शन कराती है। इस दौरान हिंदी विभाग द्वारा पिछले दिनों आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। प्रश्न मंच और वाद विवाद में वेद प्रकाश को प्रथम पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। डॉ. बलबीर सिंह, डॉ. अमरेश त्रिपाठी, डॉ. उदयन मिश्रा, मेजर डॉ. पीके पांडेय, डॉ. प्रभाकर सिंह, डॉ. आनंद द्विवेदी, डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. अनुपमा शाही, डॉ. प्रेरणा दुबे, डॉ. चंद्रप्रभा गुप्ता, डॉ. साधना सिंह, डॉ. रेखा मेहता और डॉ. रूपाली श्रीवास्तव मौजूद रहे।