फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   आधुनिक चिकित्सा की नकल से पिछड़ा आयुर्वेद

आधुनिक चिकित्सा की नकल से पिछड़ा आयुर्वेद

Sat, 16 Mar 2019 02:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 16 Mar 2019 02:06 AM IST
विज्ञापन
आधुनिक चिकित्सा की नकल से पिछड़ा आयुर्वेद
वाराणसी। आयुर्वेदिक औषधियों से व्याधिक्षमत्व (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ता है जिससे रोग होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। बिना किसी एंटीबायोटिक दवा के इस्तेमाल से मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। खास बात यह है कि आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण सही प्रकार से मानकों को ध्यान में रखकर किया जाए तो उनके परिणाम आश्चर्यजनक होते हैं। उक्त विचार मेरठ से आए आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. संजय जैन ने व्यक्त किए। वह शुक्रवार को बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ आयुर्वेद के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे।
विज्ञापन

मुंबई से आए प्रो. अश्वनी राउत ने गुग्गुल का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही दवा में बहुत से गुण होते हैं जिससे विभिन्न रोगों पर उनके प्रभाव को देखा जा सकता है। उत्तराखंड के डॉ. सुनील जोशी ने बताया कि शरीर में 107 मर्म स्थान होते हैं। यदि उस स्थान को चिन्हित करके दबाया जाए तो क ई रोगों में तत्काल आराम मिलता है।
विज्ञापन

संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण ने बताया कि आयुर्वेद के छात्रों को प्रथम वर्ष से ही वैद्य होने के उपरांत उनकी अद्वितीय क्षमता के बारे में बताने की आवश्यकता है। एमिरिटस प्रो. महेंद्र सिंह बासु ने बताया कि आयुर्वेद की चिकित्सा द्वारा नेत्र रोग को ठीक करने की काफी संभावनाएं हैं। सत्रों के दौरान पैनल डिस्कशन की अध्यक्षता मुंबई से आये अशोक वैद्य, आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रधानाचार्य उमेश शुक्ला, प्रो. जीएस तोमर, जर्मनी से आये डॉ. प्रिक, उत्तर प्रदेश आयुर्वेद चिकित्सा के पूर्व निदेशक प्रो. केके ठकराल ने की।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed