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हंसदेवाचार्य ने भक्ति का सबसे दिया समान अधिकार
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वाराणसी। हंसदेवाचार्य ने सभी को भक्ति का समान अधिकार दिया। दुर्घटना में उनके असामयिक निधन से छुआछूत खत्म करने के अभियान को गहरा धक्का पहुंचा है। राम मंदिर आंदोलन के अगुआ के असमय चले जाने से रामभक्तों को गहरा दुख हुआ है। ये विचार पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद एवं वैष्णव विरक्त संत समाज के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसेदवाचार्य की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किए गए।
पुष्पांजलि सभा में सभी संतों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगद्गुरु पुष्प अर्पित किया। दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। महंत अवध किशोर दास ने कहा कि जगद्गुरु ने सामाजिक एकता का संदेश दिया। महंत मोहन दास ने कहा कि जगद्गुरु का जाना संत समाज की क्षति है। महंत सियाराम दास ने कहा कि हंसदेवाचार्य का सामाजिक समरसता आंदोलन हर युग में प्रासंगिक रहेगा। महंत धनधान्य ने कहा कि श्रीराम के चरित्र को घर-घर पहुंचाने और भारतीय संस्कार को प्रचारित करने में हंसदेवाचार्य जी की बड़ी भूमिका थी। महंत सर्वेश्वर शरण व महंत ईश्वर दास ने कहा कि रामानंदी सम्प्रदाय का कार्य ही जाति-पंथ के भेद को मिटाना है। मुख्य वक्ता पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास ने कहा कि जगद्गुुरु ने सभी संप्रदायों को एक मंच पर लाने का काम किया। महंत डॉ. के.के. दास ने अध्यक्षता की। सभा में महंत सत्य भूषण दास, महंत धनुर्धारी जी, डॉ. श्रवण दास, राघव दास, कोतवाल मोहन दास, विष्णु दास, सतानंद दास, विजय दास, राम चरण दास, डॉ. राजीव, मो. अजहरूद्दीन, फहीम अहमद, अब्दुल कलाम, वसीम अहमद, फहीम, नजमा परवीन, खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी आदि लोगों ने भाग लिया।
उधर ब्रह्र्षि बलदेव संस्कृत विद्यालय में भी शोक सभा हुई। प्रधानाचार्य मधुकर ठाकुर ने स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान चंद्रभूषण झा, महेश शर्मा ने उनके व्यक्तित्व पर चर्चा की। अंत में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
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पुष्पांजलि सभा में सभी संतों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगद्गुरु पुष्प अर्पित किया। दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। महंत अवध किशोर दास ने कहा कि जगद्गुरु ने सामाजिक एकता का संदेश दिया। महंत मोहन दास ने कहा कि जगद्गुरु का जाना संत समाज की क्षति है। महंत सियाराम दास ने कहा कि हंसदेवाचार्य का सामाजिक समरसता आंदोलन हर युग में प्रासंगिक रहेगा। महंत धनधान्य ने कहा कि श्रीराम के चरित्र को घर-घर पहुंचाने और भारतीय संस्कार को प्रचारित करने में हंसदेवाचार्य जी की बड़ी भूमिका थी। महंत सर्वेश्वर शरण व महंत ईश्वर दास ने कहा कि रामानंदी सम्प्रदाय का कार्य ही जाति-पंथ के भेद को मिटाना है। मुख्य वक्ता पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास ने कहा कि जगद्गुुरु ने सभी संप्रदायों को एक मंच पर लाने का काम किया। महंत डॉ. के.के. दास ने अध्यक्षता की। सभा में महंत सत्य भूषण दास, महंत धनुर्धारी जी, डॉ. श्रवण दास, राघव दास, कोतवाल मोहन दास, विष्णु दास, सतानंद दास, विजय दास, राम चरण दास, डॉ. राजीव, मो. अजहरूद्दीन, फहीम अहमद, अब्दुल कलाम, वसीम अहमद, फहीम, नजमा परवीन, खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी आदि लोगों ने भाग लिया।
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उधर ब्रह्र्षि बलदेव संस्कृत विद्यालय में भी शोक सभा हुई। प्रधानाचार्य मधुकर ठाकुर ने स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान चंद्रभूषण झा, महेश शर्मा ने उनके व्यक्तित्व पर चर्चा की। अंत में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
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