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नाली न खड़ंजा, समस्याओं का शिकंजा
Updated Mon, 03 Sep 2018 12:45 AM IST
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गोपीगंज। जिले में गंगा तट पर स्थित बरजी कला गांव में उम्मीद के हिसाब से विकास नहीं हो सका है। दो वर्ष पूर्व डीपीआरओ के गोद लेने के बाद भी गांव के हालात में खास बदलाव नहीं आया। जलनिकासी के इंतजाम न होने से सड़कें और गलियां ताल-तलैया बन जाती हैं। वहीं, शौचालय और आवास का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो पाया। आंगनबाड़ी केंद्र पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। कुपोषण पर भी नियंत्रण नहीं लग सका। औराई विकास खंड के बरजी कला गांव गंगा से सटा हुआ है। करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव में कुल 1400 मतदाता है। कुपोषण मिशन के तहत दो साल पूर्व डीपीआरओ ने गांव को गोद लिया था लेकिन आज तक आंगनवाड़ी केंद्र का भवन तक नहीं बन सका। इससे वहां आने वाले बच्चों को पंचायत भवन और परिषदीय स्कूलों में बैठना पड़ता है। तमाम प्रयासों के बाद भी कुपोषण की समस्या भी बनी हुई है। दो आंगनवाड़ी केंद्रों पर करीब 75 बच्चे पंजीकृत हैं जिनमें 15 कुपोषित हैं। गांव के विकास के लिए प्रधानमंत्री आवास, शौचालय आवंटित किए गए लेकिन अब तक उनका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। ग्रामीण बालकेश्वरनाथ दूबे ने कहा कि गांव में इंटरलाकिंग और नाली का निर्माण नहीं होने से बारिश में सड़कें-गलियां पानी से लबालब हो जाती हैं। कीचड़ और जलभराव के चलते बदतर हालात हो जाते हैं। राजकुमार यादव ने बताया कि नाली न बनने से घरों का पानी भी गलियों में बहता रहता है। कई स्थानों पर जलभराव से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। गांव में दो आंगनवाड़ी केंद्र हैं, लेकिन उनके लिए भवन नहीं है। पंचायत भवन में ही उनका संचालन किया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंदा देवी और पूनम देवी ने बताया कि उनके यहां पंजीकृत बच्चों में 12 कुपोषित और चार अति कुपोषित हैं।
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