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जयशंकर प्रसाद की पांडुलिपियों को लेकर वंशजों में रार

Sun, 04 Feb 2018 02:28 AM IST
Updated Sun, 04 Feb 2018 02:28 AM IST
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जयशंकर प्रसाद की पांडुलिपियों को लेकर वंशजों में रार
वाराणसी। हिंदी साहित्य जगत के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक महाकवि जयशंकर प्रसाद की पांडुलिपियों को लेकर उनके वंशजों में रार छिड़ गई है। मामला घर की चौखट से निकल कर थाने तक पहुंच गया। शुक्रवार की रात चेतगंज थाने में महाकवि के पोते महाशंकर प्रसाद ने अपने भाई और उनके दो बेटों के खिलाफ आपराधिक न्यासभंग और चोरी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई है।
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सरायगोवर्धन निवासी महाशंकर प्रसाद द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार जयशंकर प्रसाद की कामायनी, आंसू जैसी अन्य जग विख्यात साहित्यिक कृतियों की पांडुलिपियों को सहेज कर रखने के लिए प्रसाद न्यास बनाया गया था। इस न्यास के वे प्रमुख न्यासी हैं और यहां से महाकवि की बेशकीमती पांडुलिपियां व उनके परिधान गायब हैं। इन्हें गायब करने का आरोप महाशंकर ने अपने भाई आनंद शंकर प्रसाद और उनके दो बेटों विनय शंकर व रवि शंकर पर लगाया है। महाशंकर का कहना है कि उनके भाई व भतीजों ने पांडुलिपियों और परिधानों को बेच कर रुपये कमा लिए। यह भावी पीढि़यों का बहुत बड़ा नुकसान है। दइस संबंध में इंस्पेक्टर चेतगंज ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। तफ्तीश में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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